...ग्राउंड रिपोर्ट
देहुरीधार पंचायत के पांच गांवों के लोग जान-जोखिम में डालकर पार कर रहे न्यूली खड्ड
तीन साल पहले खड्ड में बाढ़ आने से बह गया था पैदल पुल
महेंद्र पालसरा
न्यूली/सैंज (कुल्लू)। जिले की सैंज घाटी की दुर्गम ग्राम पंचायत देहुरीधार के पांच गांवों के ग्रामीणों को आज भी जान-जोखिम में डालकर खड्ड पार करनी पड़ रही है। तीन साल पहले न्यूली खड्ड में बाढ़ आने के कारण जलस्तर बढ़ने से पैदल पुल बह गया था। इसके स्थान पर अब तक लोक निर्माण विभाग नया पुल स्थापित नहीं कर पाया है। इस कारण ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि खड्ड पर झूला स्थापित है, लेकिन वह भी जर्जर हालत में है। कई बार झूला रस्सी फंसने के कारण खड्ड के ठीक ऊपर बीचोंबीच फंस जाता है, जिससे तेज बहाव देख ग्रामीणों की सांसें अटक जाती हैं। खड्ड पार करने में सबसे अधिक परेशानी स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। उन्हें जान-जोखिम में डालकर खड्ड पर स्थापित जर्जर झूले से आर-पार जाना पड़ रहा है।
कई बार ग्रामीण इस समस्या को जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के समक्ष उठा चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण मोहर सिंह, अनुज, रामलाल, रोहित, आलम चंद, राकेश, मोहित ने कहा कि साल 2023 में आई प्राकृतिक आपदा में न्यूली खड्ड पर बना पैदल पुल बह गया है। इसके बाद दोबारा पुल के निर्माण करवाने की दिशा में कोई पहल नहीं हो पाई है। पंचायत के गांव न्यूली, केऊली, गोऊल, बजाहरू खौल और बजाहरू न्यूली के ग्रामीणों को रोजाना परेशान होना पड़ता है। ग्रामीणों को रोजाना मजबूरन जर्जर झूले की मदद से न्यूली खड्ड को जान जाेखिम में डालकर पार करना पड़ता है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राजेश शर्मा ने कहा कि कनिष्ठ अभियंता से मौके की रिपोर्ट मांगी जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार आगामी कार्य किया जाएगा।
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देहुरीधार पंचायत में साल 2023 और 2025 में प्राकृतिक आपरा ने कहर बरपाया है। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण प्रभावित ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। कई बार पंचायत के विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं और न्यूली में दोबारा पुल स्थापित करने की मांग प्रशासन व लोक निर्माण विभाग से की गई, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। -भगत राम, प्रधान ग्राम पंचायत देहुरीधार
देहुरीधार के ग्रामीणों की सुविधाओं को दरकिनार किया जा रहा है। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग न्यूली खड्ड पर तीन साल पहले बहे पैदल पुल के स्थान पर नया पुल को स्थापित नहीं कर पाए हैं। इस वजह से रोजाना ग्रामीणों को रोजाना खड्ड जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ता है। -प्रेम सोनी, पूर्व बीडीसी