हिमाचल प्रदेश पदोन्नत प्राध्यापक संघ कुल्लू के प्रधान मनोज कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के 7000 से अधिक पदोन्नत प्रवक्ता शिक्षा विभाग की ढुलमुल नीति के चलते परेशान हैं और प्रदेश शिक्षा विभाग सरकार के आदेशों को भी नहीं मान रहा है। संघ के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि स्कूल कैडर के प्रवक्ताओं की वरिष्ठता सूचि जिसे न्यायालय ने निरस्त कर दिया था तथा 25 जून 2004 को तत्कालीन शिक्षा सचिव ने न्यायालय के आदेशानुसार स्कूल प्रवक्ता की वरिष्ठता सूची को 1:1 के आधार पर सीधी भर्ती व पदोन्नत प्रवक्ता करने के शिक्षा निदेशक को आदेश दिए थे। हैरानी की बात है कि आज तक शिक्षा विभाग ने उन आदेशों की अनुपालना नहीं की और इसका खामियाजा प्रदेश के पदोन्नत प्रवक्ता वर्ग को भुगतना पड़ रहा है। संघ ने सरकार से उनकी मांगों को पूरा करने के अलावा प्रधानाचार्य के पद के लिए योग्यता बीएड अनिवार्य की भी मांग की है।
जिला प्रधान मनोज कुमार, वरिष्ठ उप प्रधान हीरा लाल, सुरेश लाल, महासचिव प्रेम शर्मा, वित्त सचिव विरेंद्र कतना, उपप्रधान गगन गुलेरिया व प्रेम सिंह ठाकुर, संयुक्त सचिव राकेश शर्मा, सहसचिव वेद राम, मुख्य अंकेक्षक बेली राम, अंकेक्षक तेज सिंह, संगठन सचिव श्याम लाल, मुख्य सलाहकार बलदेव, सलाहकार जितेंद्र, मुख्यालय सचिव राम लाल, कानूनी सलाहकार कृष्ण चंद, मनमोहन शर्मा, श्यामा नंद, डोला राम, यश पल, नरेंद्र कुमार जसवाल, अमित डोगरा, ललित मोहन शर्मा, खेम सिंह, रामरथ वर्मा, आर्तिका शर्मा, कमल मणि, अनीता, सोनम, सुरेंद्र चौहान, सुरिंद्र कुमार, प्रेम प्रकाश तथा नरेंद्र कुमार ने कहा कि प्रधानाचार्य वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में कक्षा छठी से बारहवीं कक्षा तक का प्रशासनिक अधिकारी होता है। सरकार द्वारा गुणात्मक शिक्षा के लिए सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत बहुत सी योजनाएं चलाई गई हैं और मात्र दो कक्षाओं के अध्यापन के अनुभव के आधार पर किसी भी अप्रिशिक्षित प्रवक्ता को मात्र वरिष्ठता के आधार पर स्कूल मुखिया के पद पर पदोन्नत करना बच्चों के साथ सरासर अन्याय है।