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Kullu News: भाषा को सरल बनाने का माध्यम है टांकरी लिपि

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सीखना ही नहीं लिपि के संरक्षण का भी लें जिम्मा : यतिन पंडित
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। टांकरी लिपि की उत्पत्ति शारदा लिपि से हुई है। टांकरी भाषा को सरल और प्रभावी बनाने का एक माध्यम है। ऐसे में इस लिपि को सीखना ही नहीं, बल्कि इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए भी आगे आना है। यह बात वरिष्ठ लेखक एवं सेवानिवृत्त एजीएम नाबार्ड तोबदन ने कही। देवसदन कुल्लू में टांकरी लिपि पर आधारित प्रशिक्षण कार्यशाला चल रही है।
भाषा विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में जिले के विभिन्न क्षेत्रों के युवा, लेखक, साहित्यकार और शिक्षक टांकरी लिपि पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सोमवार को प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रशिक्षक एवं साहित्यकार यतिन पंडित ने प्रशिक्षुओं को चार मुख्य बिंदुओं पर प्रशिक्षण दिया। इनमें टांकरी की वर्णमाला, मात्राएं, अंक और संयुक्त अक्षर बिंदु शामिल रहे।
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प्रशिक्षक ने पहले टांकरी की वर्णमाला की विस्तार से जानकारी दी। इसके उपरांत मात्राओं, अंकों को जोड़कर कैसे अक्षर तैयार किया जाता है, के बारे में व्याख्यान दिया। पहले सत्र में उपरोक्त विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया, जबकि दूसरे सत्र में इनका अभ्यास करवाया गया। इसके अलावा विशेष तौर पर उपस्थित अतिथि वरिष्ठ लेखक एवं सेवानिवृत्त एजीएम नाबार्ड तोबदन और कुल्लवी साहित्यकार हीरालाल ठाकुर ने अपना व्याख्यान दिया। यतिन पंडित ने कहा कि कुल्लू का इतिहास 15वीं शताब्दी में टांकरी लिपि में लिखा गया है। इसका उल्लेख मंदिरों और देवताओं के मोहरों में अंकित है। संवाद
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