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Kullu News: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से छिड़ी परंपरा, समानता की नई बहस

Sat, 25 Oct 2025 09:50 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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जनजातीय क्षेत्रों में बेटियों को पैतृक संपत्ति का अधिकार न मिलने के फैसले पर दो धड़ों में बंटे लोग
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एक पक्ष कर रहा परंपरा की रक्षा की बात तो दूसरा धड़ा उठा रहा बेटियों के समान अधिकार की मांग
अशोक राणा/रतन कटोच
केलांग/सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने जनजातीय इलाकों में परंपरा और समानता की नई बहस छेड़ दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि जनजातीय क्षेत्रों में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लागू नहीं होगा। यहां प्रचलित परंपराएं ही मान्य रहेंगी। इस निर्णय के बाद लोग दो हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक ओर परंपरा की रक्षा का पक्ष तो दूसरी ओर बेटियों के समान अधिकार की मांग उठ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया है जिसमें जनजातीय क्षेत्रों में बेटियों को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत पैतृक संपत्ति का अधिकार देने की बात कही गई थी। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य के जनजातीय इलाकों में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लागू नहीं होगा बल्कि यहां रिवाजे-आम (कस्टमरी लॉ) और सामाजिक परंपराएं ही मान्य रहेंगी।
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इस फैसले के बाद जनजातीय इलाकों में पैतृक संपत्ति के अधिकार को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं जबकि कई महिलाएं इसे बदलते समय की जरूरत बता रही हैं।


जनजातीय क्षेत्रों में सदियों से रिवाजे-आम के तहत संपत्ति का बंटवारा होता है। यह व्यवस्था परंपराओं और सामाजिक मूल्यों की रक्षा करती है। बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा तो इससे ट्राइबल समाज की संरचना पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। - वीना देवी, जिला परिषद अध्यक्ष, लाहौल-स्पीति



हमारे समाज में परंपरा और जनजातीय अधिकारों का संरक्षण जरूरी है। बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान हिस्सा मिलेगा तो गैर-जनजातीय लोग भी संपत्ति के हिस्सेदार बन जाएंगे। जनजातीय बेटियां विवाह के बाद पति की संपत्ति में भी अधिकार रखती हैं। - सुमन ठाकुर, पूर्व पंचायत प्रधान सिस्सू



आज महिला सशक्तीकरण और लिंग समानता की बात करते हैं तो परंपराओं को भी समय के साथ बदलना चाहिए। बेटियों को भी पिता की संपत्ति में बेटों के समान हक मिलना चाहिए। केंद्र को जनजातीय क्षेत्रों के लिए समानता का कानून बनाना चाहिए। - निर्मला देवी, जिला परिषद सदस्य
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जब समाज समानता की ओर बढ़ रहा है तो जनजातीय क्षेत्र की बेटियों को पिता की पैतृक संपत्ति से वंचित रखना उचित नहीं है। उन्हें भी बेटों के बराबर का हक मिलना चाहिए। इसलिए इस निर्णय को बदला जाना चाहिए। - अंजू देवी, समिति सदस्य
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