कुल्लू। शहर के रेहड़ी-फड़ी धारकों ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन और नगर परिषद ने स्ट्रीट वेंडर एक्ट 2014 का उल्लंघन किया है। प्रशासन और नगर परिषद ने बिना किसी नोटिस और बिना टाउन वेंडिग कमेटी की बैठक में फैसला लिए तुगलकी फरमान जारी करते हुए रेहडी-फडी धारकों को शहर के विभिन्न स्थानों से हटा दिया है।
रेहड़ी-फड़ी धारकों ने बुधवार को सीटू के बैनर तले प्रशासन और नगर परिषद के खिलाफ मोर्चा खोला। सरवरी से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक विरोध रैली निकाली गई। वहीं, उपायुक्त कार्यालय के बाहर रेहड़ी-फड़ी धारकों ने जमकर नारेबाजी की। सीटू के महासचिव राजेश ठाकुर ने कहा कि प्रशासन और नगर परिषद ने कुल्लू शहर से रेहड़ी-फड़ी धारकों को हटाया है, जिसके कारण उन्हें परिवार का पालन-पोषण करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को स्ट्रीट वेंडर एक्ट 2014 के प्रावधानों के अनुसार रेहड़ी-फड़ी धारकों को उपयुक्त स्थान मुहैया करवाना चाहिए, ताकि वे अपनी आजीविका चला सकें। मगर कुल्लू में इसके विपरीत कार्य किया जा रहा है। तुगलकी फरमान जारी कर गरीबों का शोषण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्ट्रीट वेंडर एक्ट 2014 के प्रावधानों के अनुसार रेहड़ी-फड़ी धारकों को हटाने से पूर्व उनके लिए दूसरे उपयुक्त स्थान का चयन हो जाना चाहिए था और हटाते ही चिह्नित स्थान पर उन्हें बसाया जाना चाहिए था। प्रशासन और नगर परिषद ने ऐसा नहीं किया। शहर को साफ-सुथरा रखने का हवाला देकर रेहड़ी-फड़ी धारकों को सिर्फ हटाया गया, जो सहन नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि दो दिन के भीतर अगर रेहड़ी-फड़ी धारकों को स्थान मुहैया नहीं करवाया गया, तो आंदोलन तेज होगा।