जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की लाहौल घाटी का जनजीवन 10 दिनों बाद भी पटरी पर नहीं लौटा है। घाटी की मुख्य सड़कें बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी कर्मियों के साथ-साथ आम लोगों को अपनी ड्यूटी व कामकाज के लिए चार से पांच फुट बर्फ के बीच 25 से 30 किलोमीटर तक पैदल ही आवाजाही करनी पड़ रही है। घाटी के केलांग-सिस्सू, केलांग-उदयपुर तथा केलांग-दारजा मुख्य मार्ग अभी भी बर्फबारी से बंद चल रहे हैं। हालांकि घाटी में 140 में से 75 ट्रांसफामरों को बहाल कर दिया है। बावजूद मयाड़, तिनन और तोद घाटी में अंधेरा पसरा पड़ा है।
पूर्व मंत्री डॉ राम लाल मारकंडेय तथा जिप अध्यक्ष रमेश रुवालवा के अनुसार बीआरओ से घाटी की मुख्य सड़कों को बहाल करने की मांग की है। इसके अलावा बिजली बोर्ड से तोद वैली, तिनन और मयाड़ घाटी को भी बिजली आपूर्ति बहाल करने तथा सिस्सू, तिंदी, बारिंग, तिंगरेट, रावा, जिस्पा, चोखंग व गोंधला हेलीपैडों के हेलीकाप्टर की उड़ानें शुरू करने सरकार से मांग की है। बीआरओ के कमांडर एके अवस्थी ने कहा कि उदयपुर-केलांग व अन्य मुख्य सडकों को बहाल करने के बीआरओ को आदेश दे दिए हैं। वहीं बीआरओ के 94 आरसीसी वे शुक्रवार को उदयपुर से बर्फ हटाने का काम शुरू दिया और थिरोट तक 16 किमी तक सड़क से बर्फ को हटा दिया है। स्थानीय विधायक रवि ठाकुर ने कहा कि बर्फबारी से लाहौल में अस्त-व्यस्त चल रहे जनजीवन को पटरी पर लाने के लिए वह शिमला में लोनिवि के मुख्य अभियंता से मिले हैं और उन्होंने सड़कों से बर्फ हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं।