दारचा-शिंकुला-पदुम-लेह वाया जांस्कर सड़क पर आधिकारिक तौर पर शुरू होगी आवाजाही
करीब डेढ़ माह बाद दौड़ेंगे वाहन, मुख्य अभियंता हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे वाहन
पिछले साल चार अप्रैल को यातायात के लिए बहाल हो गया था शिंकुला दर्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। दारचा-शिंकुला-पदुम-लेह वाया जांस्कर सड़क आवाजाही करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। समुद्र तल से 16,558 फीट ऊंचा शिंकुला दर्रा मंगलवार को अधिकारिक तौर पर वाहनों के लिए बहाल हो जाएगा।
करीब डेढ़ माह बाद इस सड़क पर छोटे-बड़े वाहन दौड़ेंगे। बीआरओ की योजक परियोजना ने मंगलवार को शिंकुला दर्रा में कार्यक्रम रखा है। इसमें योजना परियोजना के मुख्य अभियंता हरी झंडी दिखाकर इस सड़क से वाहनों को हरी झंडी दिखाएंगे। टीम ने एक सप्ताह पहले मनाली-दारचा-लेह-लद्दाख की जांस्कर घाटी को जोड़ने वाला शिंकुला दर्रा बहाल कर दिया था। इसे आठ अप्रैल को अधिकारिक तौर पर बहाल किया जा रहा है। सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों ने बताया कि शिंकुला दर्रा डेढ़ माह पहले यातायात के लिए ठप हो गया था। मार्ग खुलने से जांस्कर, लेह-लद्दाख के साथ लाहौल घाटी के पर्यटन में तेजी आएगी।
शिंकुला दर्रा से गुजरने वाली दारचा, पदुम, नीमू सड़क को पिछले साल बीआरओ ने चार अप्रैल को बहाल कर दिया था। इस बार अधिक बर्फबारी हुई है। इससे शिंकुला दर्रा को बहाल करने में देरी हुई है। बीआरओ के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को शिंकुला दर्रा में वाहनों की आवाजाही को लेकर ओपनिंग सेरेमनी होगी। बीआरओ के मुख्य अभियंता वाहनों को हरी झंडी दिखाएंगे। दारचा-सरचू के रास्ते सामरिक महत्व की मनाली-लेह सड़क खुलने में अभी समय लग सकता है। मार्ग की बहाली को बीआरओ के 70 आरसीसी की 12 मशीनों के साथ 80 जवान मोर्चा संभाले हुए हैं। गत साल मनाली-लेह मार्ग 23 अप्रैल को बहाल हुआ था।