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सेब सीजन में जीप चालकों की चांदी, सब्जी मंडी के लग रहे कई चक्कर

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कुल्लू जिला में जीपो में हो रहा सेब का कारोबार। इससें जीप मालिक अच्छे पैसे कमा रहे है। - फोटो : Kullu
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कुल्लू। कोरोना काल में अधिकतर बागवान स्थानीय सब्जी मंडियों में ही सेब बेच रहे हैं। बागवान अपने सेब को दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी के लिए ट्रक में बेचने की बजाय क्रेटों में भर कर स्थानीय मंडियों में भेज रहे हैं। जिससे जीप चालकों की खूब चांदी हो गई है। जीप चालकों के सब्जी मंडियों में कई चक्कर लग रहे हैं।
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आलम यह है कि कई जीप चालक शाम को ही मंडियों में क्रेट लेकर जा रहे हैं। इसके बाद वापस आ रहे हैं। सुबह के समय जीप चालक फिर से मंडी में दस्तक दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि सब्जी मंडी बंदरोल में ही प्रतिदिन 150 जीपों में सेब आ रहा है। भुंतर और पतलीकूहल सब्जी मंडियों में यह संख्या 150 से पार हो रही है। एक जीप में 80 से 100 क्रेट आते हैं। दिल्ली के लिए बागवान ट्रकों की डिमांड नहीं कर रहे हैं। इसके पीछे यह वजह मानी जा रही है कि सब्जी मंडी में सेब बेचने के लिए बागवानों को अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ रही है। पैकिंग, दिल्ली के किराया और वारदाना का खर्चा बागवानों का बच रहा है। जिससे अधिकतर बागवान जीपों में सेब भरकर मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। स्थानीय मंडियों में इन दिनों सेब 55 से 60 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रहा है।
बागवान नरेश कुमार, मोहर सिंह, लाल चंद, डोले राम, श्याम सिंह, मदन लाल और तारा चंद ने कहा कि जीपों में क्रेट का किराया किलोमीटर के हिसाब लिया जा रहा है। किराये में इस बार पांच से दस रुपये तक इजाफा किया गया है। मंडियों में दाम अच्छे रहने से बागवानों को किराया दिल्ली के मुकाबले कम ही पड़ रहा है। इस संबंध में बंदरोल सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन ठाकुर ने कहा कि मंडी में प्रतिदिन 150 से अधिक जीपों में सेब सब्जी मंडी में पहुंच रहा है। सितंबर महीने तक यह क्रम जारी रहेगा।
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