मनाली से 140 किमी दूर लाहौल में विंटर टूरिज्म को मिली रफ्तार
रोज 16 हजार फीट ऊंचे दर्रा में पहुंच रहे 300 फोर बाई फोर वाहन
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लद्दाख और हिमाचल के बीच स्थित शिंकुला दर्रा इन दिनों सैलानियों की पहली पसंद बन गया है। समुद्रतल से करीब 16,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित बर्फ से ढका शिंकुला दर्रा दिन के समय पर्यटकों की आवाजाही से गुलजार है।
मनाली से करीब 140 किमी और केलांग से 65 किमी दूर जांस्कर-लाहौल को जोड़ने वाला यह सामरिक दर्रा पहली बार दिसंबर में इतनी तेजी से पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। दर्रे में इस समय आधा फुट से अधिक बर्फ जमी हुई है। यहां पर्यटक बर्फ में अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं। शिंकुला खुलने के बाद घाटी में पर्यटन कारोबारी एक बार फिर उत्साहित हैं।
शिंकुला की ओर जाने वाले सैकड़ों यात्री जिस्पा, गेमूर, केलांग, गोंदला और सिस्सू में नाइट स्टे कर रहे हैं, जिससे स्थानीय होटलों, होमस्टे संचालकों और व्यापारियों को अच्छी आमदनी हो रही है।
लाहौल के फोर-बाई-फोर वाहन चालक भी लगातार बुकिंग मिलने से खुश हैं। रोज करीब 250 से 300 वाहन मनाली से शिंकुला पहुंच रहे हैं। पर्यटन कारोबारी प्रणव, राजेश, टशी और मंगल ने बताया कि शिंकुला दर्रा विंटर टूरिज्म के लिहाज से लाहौल घाटी के लिए नया और मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है। पुणे से पहुंची पर्यटक तान्या ने कहा कि बर्फ से लकदक शिंकुला में पहुंचकर ऐसा महसूस होता है जैसे जन्नत में आ गए हों। दिल्ली से आए मुनीश और जसप्रीत ने बताया कि वह पहली बार समुद्रतल से इतनी ऊंचाई पर पहुंचे हैं और पूरा इलाका किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। जिला पर्यटन अधिकारी का कार्यभार देख रहीं कल्याणी गुप्ता ने बताया कि प्रशासन पर्यटन स्थलों में शौचालय, पार्किंग और अन्य मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने पर तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिंकुला दर्रा आने वाले समय में विंटर टूरिज्म का प्रमुख आकर्षण बन सकता है। शिंकुला दर्रे में सैलानियों की बढ़ती चहल-पहल से लाहौल घाटी में इस बार दिसंबर माह में पहली बार पर्यटन कारोबार को नया बूस्ट मिला है।