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Kullu News: जटेहड़ बिहाल इलाके में 2.50 करोड़ से लगेगी सुरक्षा दीवार

Sat, 27 Dec 2025 10:46 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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मीटिगेशन योजना के तहत पीडब्ल्यूडी ने प्रदेश सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा प्रस्ताव
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एचपीएमसी कोल्ड स्टोर से गोसदन तक, ब्यास के राइट बैंक पर लगनी है आरसीसी दीवार

संजय ठाकुर
पतलीकूहल (कुल्लू)। विकास खंड नग्गर के तहत ग्राम पंचायत कटराईं के जटेहड़ बिहाल क्षेत्र को ब्यास नदी की बाढ़ से बचाने की दीर्घकालिक और ठोस सुरक्षा योजना तैयार की गई है।
इसके तहत एचपीएमसी कोल्ड स्टोर से लेकर गोसदन तक, ब्यास नदी के राइट बैंक पर आरसीसी सुरक्षा दीवार लगाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। यह प्रस्ताव लैंडस्लाइड मीटिगेशन योजना के अंतर्गत लोक निर्माण विभाग ने उच्चाधिकारियों के माध्यम से सरकार को स्वीकृति के लिए भेज दिया है। योजना को मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
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बता दें कि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एचपीएमसी कोल्ड स्टोर से गोसदन तक 2.50 करोड़ रुपये से सुरक्षा दीवार लगाई जाएगी। साल 2023 से अब तक ब्यास नदी ने इस क्षेत्र में लगातार कटाव और बाढ़ की स्थिति पैदा की है। इससे सरकारी संपत्तियों के साथ आम जनता और पशुधन को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है। अब लोक निर्माण विभाग ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला है। विभाग आरसीसी दीवार लगाने की योजना पर काम कर रहा है।
उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अनूप शर्मा ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में ब्यास नदी की बाढ़ से जटेहड़ क्षेत्र में भारी नुकसान हो रहा है। प्रस्तावित आरसीसी संरचना ब्यास नदी के तेज बहाव को नियंत्रित करने में सहायक होगी। भविष्य में बाढ़ और कटाव से होने वाली क्षति को काफी हद तक रोकेगी। इस कार्य पर करीब 2.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

तीन सालों से लगातार हो नुकसान
वर्ष 2023, 2024 और 2025 में भीषण बाढ़ ने जटेहड़ बिहाल क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। ब्यास के उफनते जलस्तर से एचपीएमसी कोल्ड स्टोर भवन को नुकसान पहुंचा है। संपर्क सड़कें बह गई हैं। इससे आवाजाही बाधित हो गई है। गोसदन भी बाढ़ की चपेट में आ गया। इससे पशु सड़कों पर आ गए।
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स्थायी और वैज्ञानिक समाधान की आवश्यकता
मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ के सक्रिय हस्तक्षेप और प्रयासों से गोसदन का पुनर्निर्माण संभव हो सका। इससे पशुधन को दोबारा सुरक्षित आश्रय मिला। बावजूद इसके ब्यास नदी के बार-बार बदलते रुख और बढ़ते कटाव को देखते हुए यह स्पष्ट हो गया है कि केवल पुनर्निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थायी और वैज्ञानिक समाधान की आवश्यकता है।
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