हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मंडी और लाहौल-स्पीति जिलों की ऊंची पहाड़ियों में बनी गोल्फ झीलों (ग्लेशियर लेक) से संभावित खतरे का आकलन अब वैज्ञानिक स्तर पर किया जाएगा। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान मौहल के वैज्ञानिक इन झीलों के प्रभाव और जोखिम का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इस अध्ययन में यह आंका जाएगा कि यदि कोई ग्लेशियर झील फटती है तो निचले क्षेत्रों में कितना नुकसान हो सकता है और कौन-कौन से इलाके इसकी चपेट में आ सकते हैं। खासतौर पर कुल्लू, मंडी और लाहौल रेंज की पहाड़ियों में स्थित झीलों पर यह अध्ययन केंद्रित रहेगा। पार्वती बेसिन की झीलों को इस परियोजना के तहत इंटरवेंशन साइट के रूप में चुना गया है।
प्रदेश के कुल्लू, मंडी और लाहौल-स्पीति जिलों में बनी ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए जीबी पंत संस्थान के वैज्ञानिक विस्तृत अध्ययन करेंगे। इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, जिससे भविष्य में संभावित आपदाओं से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके। -आरके सिंह, प्रभारी, गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान, मौहल