फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

युद्ध का असर: फ्रांस सहित अन्य देशों में भी घट गई गुच्छी की मांग, स्थानीय बाजार में दाम भी कम

Sat, 04 Apr 2026 11:06 AM IST
Krishan Singh बलदेव राज, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू।

सार

भारत से सबसे अधिक गुच्छी यूरोपियन देश फ्रांस को निर्यात की जाती है। इसके साथ ही यूरोप के कई अन्य देशों में भी गुच्छी भेजी जाती है।
विज्ञापन
हिमाचली गुच्छी - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका, इस्राइल और ईरान युद्ध के चलते जहां रसोई गैस को लेकर संकट जैसी स्थिति बनी हुई है। वहीं इसका असर गुच्छी पर भी पड़ा है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुच्छी की मांग घट गई है। भारत से सबसे अधिक गुच्छी यूरोपियन देश फ्रांस को निर्यात की जाती है। इसके साथ ही यूरोप के कई अन्य देशों में भी गुच्छी भेजी जाती है। युद्ध के बाद इसकी मांग पर असर पड़ा है। दूसरी ओर गुच्छी के दाम भी लोकल बाजार में महज 5000 से लेकर 5500 रुपये प्रतिकिलो रह गए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

हालांकि, आने वाले दिनों में दामों में इजाफा होने की उम्मीद है। गुच्छी पर इस बार मौसम की मार भी पड़ी है। पिछले साल के मुकाबले इस बार गुच्छी की पैदावार 30 से 40 फीसदी तक कम है। औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी की पांच सितारा होटलों में मांग रहती है। स्थानीय निवासी रेवत राम, कमल चंद ने कहा कि इस साल पहाड़ों पर गुच्छी की तलाश के लिए जा रहे ग्रामीण खाली लौट रहे हैं। वहीं व्यापारियों को भी गुच्छी नहीं मिल पा रही है। इसका मुख्य कारण कम बारिश और बर्फबारी का होना माना जा रहा है। कुल्लू में गुच्छी के व्यापारी विवेक शर्मा ने कहा कि अभी गुच्छी बेहद कम मात्रा में आ रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें