कुल्लू। हरियाणा की सप्तक सोसायटी रोहतक के कलाकारों ने राष्ट्रीय नाट्योत्यसव की छठी संध्या में दर्शकों को खूब लोट-पोट किया। कलाकारों ने नाटक सैंया भये कोतवाल में संजीदा तरीके से वर्तमान समय में फैले प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर किया। संध्या में उपायुक्त कुल्लू तोरुल एस रबीश बतौर मुख्यातिथि उपस्थित रहीं।
नाटक में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के मुद्दे को उठाया गया। हवलदार का कोतवाल बनने का नंबर है। वह बुजुर्ग कोतवाल के मरने का इंतजार कर रहा है और अपनी प्रेमिका मैनावती से शादी भी कोतवाल बनने के बाद ही करना चाहता है। बुजुर्ग कोतवाल तो मर जाता है, लेकिन राजकाज के प्रति लापरवाह राजा की कमजोरी का फायदा उठाकर राज्य का प्रधान अपने अयोग्य साले को कोतवाल बना देता है।
हवलदार का सपना टूट जाता है और वह नए कोतवाल की असलियत राजा के सामने लाकर उसे हटवाने की योजना बनाता है। वह अपने साथी सिपाही तथा मैनावती के साथ मिलकर कोतवाल से राजा की कई सारी चीजें चोरी करवाता है। राजा को चोरी का पता तब चलता है, जब उसका पलंग भी चोरी हो जाता है।
हवलदार राजा को सारी कहानी बताता है। ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि कोतवाल स्वयं सब कुछ अपने मुंह से बोल देता है। फिर राजा हवलदार को नया कोतवाल बना देता है और मैनावती से उसकी शादी हो जाती है। नाटक में अविनाश, सुरेंद्र, चेरी, शक्ति, मनीष, नवदीप आदि कलाकारों ने अभिनय किया।