आठ महीने से छह रूटों पर बस सेवा ठप, टैक्सियों में करना पड़ रहा महंगा सफर
घाटी के ग्रामीण बोले- टैक्सियों का किराया बढ़ने से बढ़ी लोगों की परेशानी
सामान ढुलाई की लागत भी बढ़ी, 15 पंचायतों के ग्रामीण हो रहे परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। आठ महीने पहले आई आपदा के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि अब आवागमन की समस्या ने सैंज घाटी के लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। घाटी के आठ में से छह बस रूटों पर सेवा पूरी तरह ठप है, जिससे शिक्षा, रोजगार और इलाज के लिए रोज सफर करने वालों को महंगा और जोखिम भरा विकल्प चुनना पड़ रहा है।
साल 2025 की आपदा के बाद सैंज घाटी की रफ्तार जैसे थम सी गई है। सड़कें जगह-जगह बाधित हैं और आठ में से छह बस रूटों पर पिछले आठ महीनों से बस सेवा बंद पड़ी है। ऐसे में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी कार्यों के लिए सैंज, कुल्लू, भुंतर, औट और जिला मुख्यालय तक जाने वाले लोगों को अब महंगा सफर तय करना पड़ रहा है।
घाटी के लोगों का कहना है कि पहले जहां सफर आम आदमी की पहुंच में था, वहीं अब टैक्सियों के किराये में बढ़ोतरी होने के कारण दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों और मजदूर वर्ग पर सीधा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद से घाटी के अधिकतर बस रूट ठप हैं। इससे लोगों को मजबूरन टैक्सी या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। यह महंगा साबित हो रहा है। गोपाल, अरुण, लीलाधर, उत्तम राम, हरि सिंह धामी, जितेंद कुमार, विनोद कुमार और हेत राम ने कहा कि परिवहन महंगा होने से सामान ढुलाई की लागत भी बढ़ गई है जिसका असर सीधे बाजार भाव पर दिखाई दे रहा है। सैंज क्षेत्र की 15 पंचायतों के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घाटी के सभी रूटों पर बस सेवा शुरू की जाए ताकि लोगों को बस सेवा का लाभ मिल सके। सैंज घाटी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले आठ महीनों से अधिकतर रूटों पर बस सेवा ठप है।
विद्यार्थियों, बुजुर्गों, मरीजों, महिलाओं और रोजाना काम पर जाने वाले लोगों के लिए आवागमन एक बड़ी चुनौती बन गया है। अतिरिक्त उपायुक्त कुल्लू अश्वनी कुमार ने कहा कि लोक निर्माण विभाग को प्राथमिकता के आधार पर बंद सड़कों को खोलने के निर्देश दिए गए हैं।