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सड़क से जुड़ा लाहौल का अंतिम गांव योचे

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लाहौल में मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने 2 करोड़ दस लाख से बने योचे पुल का वर्चुअल उद्घाटन किया। - फोटो : Kullu
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। लद्दाख सीमा से सटे लाहौल का अंतिम गांव योचे आजादी के 73 साल बाद सड़क से जुड़ गया है। मंत्री डॉक्टर रामलाल मारकंडा ने योचे सड़क पर बने स्टील ट्रस ब्रिज का वर्चुअल लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया।
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लोनिवि चिनाव मंडल के अधीन इस पुल के निर्माण पर 2.10 करोड़ खर्च हुए हैं। योचे गांव दारचा से करीब नौ किमी पूर्व दिशा पर बस है। यह लाहौल घाटी के सबसे दुर्गम गांव में से एक है। ग्रामीण दोरजे ने बताया कि ग्रामीण नगदी फसलों के साथ खाद्यान्न खच्चर या पीठ पर ढाने को मजबूर थे। पुल बनने के बाद अब बस और बड़े मालवाहक वाहन गांव पहुंच सकेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि पुल के बगैर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। कोरोना काल में विभाग ने योचे पुल को तैयार कर जनता को बड़ी राहत दी है।
ग्रामीणों ने पुल के लिए सीएम जयराम ठाकुर और मंत्री डॉक्टर राम लाल मारकंडा का आभार व्यक्त किया। मारकंडा ने कहा कि लोनिवि ने वैश्विक महामारी के बीच भी विकासात्मक कार्यों की गति को रुकने नहीं दिया। लोनिवि के अधिशासी अभियंता बीएस नेगी ने बताया कि योचे पुल को रिकॉर्ड दो साल के भीतर पूरा किया है।
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