देवसदन कुल्लू में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन कुल्लू तथा जिला सांस्कृतिक परिषद कुल्लू के संयुक्त तत्वावधान में वार्षिक नाट्योत्सव कुल्लू रंग मेला का आगाज हो गया है। कुल्लू की एक ऐतिहासिक घटना पर आधारित नाटक राणा झींणा के मंचन से मेले का शुभारंभ हुआ।
नाटक ऐतिहासिक होते हुए भी कई समसामयिक मुद्दों को समेटे हुए है। राणा झींणा जो कुल्लू की ऊझी घाटी का शासक था, जिसके दरबार में मुछियाणी नाम का एक तीरंदाज था जो अनुसूचित जाति से संबंध रखता था। इस नाटक का सुंदर मंचन किया गया। केहर सिंह ठाकुर की ओर से लिखित और निर्देशित इस नाटक का अंत इंसान को इंसान ही रहने दो गीत के साथ होता है।
साथ ही यह नाटक प्रश्न उठाता है कि जाति-पाति और धर्मों की लड़ाई में इंसान कब तक उलझा रहेगा। नाटक में राणा झींणा, सिद्ध सिंह, मुछियाणी, देवकी, पंडित, मंत्री, दयालू, सेनापति, महिला की भूमिकाएं क्रमश: रेवत राम (विक्की), कुलदीप, जीवानंद, आशा, दीन दयाल, ओम प्रकाश, राकेश, श्याम, आरती आदि ने निभाई। जिला कल्याण अधिकारी कुल्लू ने इस आयोजन में विशेष शिरकत की तथा अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के नाटकों का मंचन गांव-गांव तक होना चाहिए। उन्होंने बताया कि शनिवार को डेढ़ बजे देव सदन में ही नाटक काक चरित्र का मंचन होगा।