भुंतर (कुल्लू)। बरसात शुरू होते ही जिया गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पार्वती नदी का जलस्तर करीब दो से तीन फुट तक बढ़ गया है। जैसे-जैसे बारिश का दौर बढ़ेगा, पार्वती नदी का प्रवाह और तीव्र होगा। ऐसे में जिया के ग्रामीणों को अपने आशियानों की चिंता सताने लगी है। पार्वती नदी में आने वाली बाढ़ कभी भी कहर बनकर टूट सकती है।
एक साल से शासन और प्रशासन ने गांव को बाढ़ से सुरक्षित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए हैं। पार्वती नदी किनारे सुरक्षा दीवार लगने से बाढ़ का खतरा कम होना था, लेकिन इस दिशा में कोई भी प्रयास नहीं हुए। इसको लेकर ग्रामीणों में रोष है। पिछले साल जुलाई की आपदा में लोगों को एहतियात के तौर पर घरों को खाली करना पड़ा था। मलाणा पावर प्रोजेक्ट चरण-दो के बांध में पानी भर गया था। इसके बाद बांध के टूटने का खतरा बना हुआ था, जिस कारण भी कई घरों को खाली करना पड़ा था।
जिया गांव से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर पार्वती नदी ब्यास में मिल जाती है। ऐसे में यहां पर नदी में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है। एक साल पहले यहां पर एक झूला पुल भी पार्वती नदी की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ था। यह पुल अभी भी नदी किनारे पड़ा हुआ है।
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नदी के बीच बने टापू से मलबा हटा दिया है। काफी हद तक काम किया गया है। यह प्रशासन के ध्यान में है, बरसात से पहले बचे हुए काम को पूरा कर दिया है। इसकी रिपोर्ट एसडीएम कुल्लू को भेज दी गई है।
-अकांक्षा शर्मा, तहसीलदार भुंतर
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नदी के बीच बने टापू से कुछ मलबा तो हटाया गया, लेकिन इसमें काम पूरा नहीं हुआ। गांव में बाढ़ का खतरा कम करने के लिए प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। पार्वती नदी में बाढ़ आने की स्थिति में नुकसान झेलना पड़ सकता है।
-संजू पंडित, जिया पंचायत प्रधान
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मानसून शुरू होने के साथ जिया के लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। डेढ़ किलोमीटर के दायरे में नदी किनारे घर बने हैं, पिछले साल हुई तबाही के बाद बाढ़ का खतरा बना हुआ है। जिया में समय रहते बाढ़ नियंत्रण कार्य किया होता तो लोगों को राहत मिलती।
-अजय राणा, ग्रामीण