खराहल (कुल्लू)। बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इससे जिले में रबी फसल की बिजाई अटक गई है। किसान गेहूं, जौ, मटर और लहसुन की बिजाई नहीं कर पा रहे हैं। अब घाटी के किसान-बागवान देवी-देवताओं के पास बारिश के लिए गुहार लगा रहे हैं।
बारिश न होना किसानों और बागवानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। इससे कृषि और बागवानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कृषि प्रसार केंद्रों में गेहूं का बीज आ चुका है। वितरण भी शुरू हो गया है, लेकिन किसान बारिश के इंतजार में हैं। दो महीने से बारिश न होने से खेतों में नमी नहीं है।
जिले के सिंचित क्षेत्रों में लहसुन की बिजाई कर दी है। अब बारिश न होने से फसलें सूखने की कगार पर हैं। ब्यास सहित अन्य नालों और प्राकृतिक जल स्रोतों में भी पानी की मात्रा बेहद कम रह गई है। जिले के 75 फीसदी किसान बारिश पर निर्भर है। जिले के किसान अमित ठाकुर, महेश, सुनू राम, अशोक ठाकुर, प्रताप, रितेश, कैलाश आदि ने कहा कि नगदी फसल मटर और अन्य फसल की बिजाई के लिए उपयुक्त समय चल रहा है लेकिन खेतों मेें नमी न होने से बिजाई रुक गई है। देवी-देवताओं की शरण में जाकर बारिश की गुहार लगाई जा रही है।
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बारिश नहीं होने से तमाम फसलों की बिजाई नहीं हो रही है। उम्मीद है कि जल्द बारिश होने से खेतों में रबी फसल की बिजाई आरंभ हो जाएगी।
-सुशील शर्मा, उपनिदेशक कृषि विभाग कुल्लू
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इतने हेक्टेयर में होती है रबी की फसलें
जिले में 14,000 से अधिक हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार होती है। इसके साथ ही 1600 हेक्टेयर भूमि में जौ की पैदावार हो रही है। मटर की फसल 2500 हेक्टेयर, लहसुन की पैदावार 1500 हेक्टेयर भूमि में होती है।
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