दशहरा में लुधियाना की शॉल को कुल्लू शॉल के नाम बेचने पर तीन लाख रुपये तक का जुर्माना होगा। यही नहीं, छह माह से लेकर तीन साल तक की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है। गत दिन शिमला में हुई बैठक के बाद जिला प्रशासन कुल्लू भी अब हरकत में आ गया है। इस बार दशहरा उत्सव में नामांकित वीवर्स को ही स्थान मिलेगा। जिला प्रशासन की ओर से चयनित वीवर्स ही कुल्लू शॉल को बेच सकेंगे।
जिला के नामांकित वीवर्स को ही प्रदर्शनी में कारोबार करने के लिए स्थान मिलेगा। इन वीवर्स को बेहतरीन क्वालिटी वाली शॉल प्रदर्शनी में रखनी होगी। गौरतलब है कि लुधियाना की शॉल को कुल्लू के नाम बेचने पर प्रशासन ने सख्ती बरतने का फैसला लिया है। वीवर्स द्वारा प्रदेश सरकार के समक्ष मामला रखने के बाद जिला प्रशासन को सरकार ने इस मामले पर गंभीरता से नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
इस बार दशहरा उत्सव के दौरान कुल्लू के नाम पर लुधियाना की शॉल बेची गई तो उसकी खैर नहीं होगी। ऐसे कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यही नहीं, चेकपोस्ट पर ही लुधियाना से कुल्लू आने वाली शॉल की जांच की जाएगी। अगर कोई वीवर्स इस चापलूसी में पकड़ा गया तो उसे पचास हजार रुपये से लेकर तीन लाख तक जुर्माना होगा। इसके अलावा उसे छह महीने से लेकर तीन साल सजा भी भुगतनी पड़ेेगी। इधर, इस संदर्भ में उपायुक्त कुल्लू राकेश कंवर ने बताया कि लुधियाना शॉल को कुल्लू शॉल के नाम से नहीं बेचने दिया जाएगा। इस पर प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी। दशहरा उत्सव के दौरान भी प्रदर्शनी में जिला के प्रमुख वीवर्स को ही कारोबार करने के लिए स्थान दिया जाएगा।