महत्वाकांक्षी पार्वती विद्युत परियोजना प्रभावितों और विस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर हिमाचल किसान सभा के बैनर तले सैंज में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रभावितों और किसान सभा ने सैंज टैक्सी स्टैंड से लेकर उपतहसील कार्यालय तक रैली निकाली। नायब तहसीलदार सैंज के माध्यम से प्रभावितों की मांगों को लेकर ज्ञापन मुख्यमंत्री, सहकारिता मंत्री प्रबंध निदेशक एनएचपीसी को सौंपा गया।
ज्ञापन में 14 दिनों के भीतर मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया गया है अन्यथा प्रभावित-विस्थापित तथा किसान सभा ने परियोजना का काम बंद करने की चेतावनी दी है। मांगों को लेकर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन तथा परियोजना प्रबंधन के प्रति अपना विरोध जताया गया। प्रभावितों की मांगों में स्थायी रोजगार, क्षतिग्रस्त मकानों और धूल से नष्ट फसलों का मुआवजा, क्षतिग्रस्त जमीन का मुआवजा तथा परियोजना की आय से दो प्रतिशत हिस्सा प्रभावितों को देना शामिल हैं। प्रभावितों ने रैली निकालने के बाद उपतहसील परिसर में सरकार तथा जिला प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
प्रभावित-विस्थापित किसान सभा के अध्यक्ष दिवान चंद ने कहा कि जिला प्रशासन, एनएचपीसी और सरकार मिलकर प्रभावितों को स्थायी रोजगार से वंचित करने पर तुले हैं। रोजगार को लेकर शिमला में प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रभावितों को विश्वास में न लेकर एकतरफा निर्णय लिया गया है, जो मजूंर नहीं होगा। किसान सभा के जिला अध्यक्ष नारायण चौहान ने सरकार और प्रशासन पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार के मंत्री या स्थानीय विधायक और प्रशासनिक अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के चलते लोगों के हकों को कंपनियों के पास बेच देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लाडा के धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।