फलों का सीजन निपटने के बाद कुल्लू के बागवानों ने किया बगीचों का रुख
पेंट और चूना लगाने का भी चल रहा काम, बागवानों ने लगाए प्रशिक्षित लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। सेब सीजन खत्म होने के बाद घाटी के बागवानों ने फिर से बगीचों का रुख कर लिया है। बगीचों में सेब, नाशपाती, प्लम, जापानी फल और अनार आदि के पौधों में काट-छांट का कार्य शुरू हो गया है।
साथ ही पेंट और चूना लगाने का कार्य भी किया जा रहा है। बगीचों में काट-छांट के लिए बागवानों ने प्रशिक्षित व्यक्तियों को लगाया है।
गौर रहे कि दिसंबर में काट-छांट का समय उचित रहता है लेकिन सेब और प्लम के पौधों में पत्ते समय से पहले गिरने के कारण एक सप्ताह पहले ही नवंबर के आखिरी सप्ताह से बागवानों ने काट-छांट शुरू कर दी थी।
इन दिनों अब तक मौसम साफ। बारिश और बर्फबारी नहीं होने से सेब के पौधों में काट-छांट करने में बागवानों को कोई परेशानी नहीं हो रही है।
बागवान कुलदीप सिंह नेगी, दौलत राम, प्रकाश, ललित ठाकुर और रामनाथ ने कहा कि सेब बगीचों की पौधों की काट-छांट ने जोर पकड़ लिया है। काट-छांट के काम को समय रहते पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घाटी में अभी बारिश नहीं हुई है। ऐसे में किसान-बागवान अभी काट-छांट का कार्य कर रहे हैं। बारिश होने पर पौधों में गोबर और खाद डालने का काम शुरू किया जाएगा।
कुल्लू फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि फलोत्पादक मंडल की ओर से समय-समय पर प्रशिक्षण शिविरों में बागवानों को पौधों की काट-छांट की जानकारी दी जा रही है। बागवानी विभाग के उप निदेशक राज कुमार ने कहा कि बागवान पौधों की काट-छांट कर सकते हैं।