एलपीएस यानि लाहौल पोटेटो सोसायटी के आलू की 65 हजार बोरियां मनाली-पतलीकूहल पहुंच चुकी हैं। इन्हें मनाली के समीप आलू ग्राउंड और 18 मील में ब्यास नदी के किनारे और पतलीकहूल में स्टॉक किया गया है। लाहौल में बची हुई करीब बीस हजार बोरियों को भी मनाली पहुंचाया जा रहा है, जिससे बर्फबारी के चलते रोहतांग बंद होने से पहले सारा उत्पाद सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाए। 1966 में लाहौल के किसानों की आर्थिकी के सुधार को बनी इस सोसाइटी में इन दिनों कुफरी चंद्रमुखी और कुफरी ज्योति नामक आलू का उत्पादन कर रही है। मनाली में इसकी ग्रेडिंग के बाद इसे नए सिरे से रिपैक किया जा रहा है।
बताया रहा है कि मनाली में आलू को स्टोर करने के बाद ग्राहकों के आवेदनों का इंतजार किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जहां देशभर के कलकता, बैंगलोर और महाराष्ट्र में इस आलू की मांग रहती है। वहीं भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश भी इस आलू के मुरीद बताए जा रहे हैं, लेकिन पिछले सालों से एलपीएस ने इन देशों को आलू देना बंद कर दिया है। इधर, एलपीएस के एमडी अमर सिंह डोगरा का कहना है कि सोसायटी एशिया में एक मॉडल मार्केटिंग सोसाइटी तौर पर काम कर रही है। सोसायटी 65 हजार आलू की बारियों को सुरक्षित मनाली पहुंचा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि सोसायटी ज्यादार पैदावार देने वाले और बीमारी मुक्त आलू बीज मुहैया करा रही है।