प्रदेश सरकार की बेरुखी और अनदेखी से लोग इतने खफा हो गए हैं कि अब वे पंचायत चुनावों का बहिष्कार करने का मन बनाने लगे हैं। ऊझी घाटी के लोगों का कहना है कि एनजीटी प्रदेश सरकार को बार-बार प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास योजना तैयार कर उसे धरातल में उतारने को कह रही है, लेकिन प्रदेश सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। पांच महीने से बेरोजगार हुए लोगों को अब रोजी-रोटी का डर भी सताने लगा है।
पर्यटन गतिविधियां शुरू न होने से वे लोग सड़क पर आ गए हैं। रविवार को भी बुरुआ गांव में ग्रामीणों ने बैठक कर बंद पर्यटन गतिविधियों के संबंध में विस्तार से चर्चा की। गांव के करीब 400 परिवारों ने एकमत से पंचायत चुनावों का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि ऊझी घाटी के नौ गांव कोठी, सोलंग, पलचान, रुआड़, कुलंग, मझाच, बुरुआ, शनाग और गोशाल के अधिकतर लोग पर्यटन गतिविधियां चलाकर अपना रोजगार चलाते हैं। ग्रामीण तेजा, सुरेंद्र और रवि का कहना है कि पर्यटन गतिविधियां बंद हो जाने से ऊझी घाटी के एक हजार से अधिक परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो गई है।
महिला रेशमा ने बताया कि घाटी की सैकड़ों महिलाएं पर्यटकों को कुल्लवी परिधान पहनाकर अपना रोजगार चला रही थीं, लेकिन पर्यटन गतिविधियों के बंद कर देने से वे सभी महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं। इन सभी ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि अगर शीघ्र उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे चुनावों का बहिष्कार करेंगे। मनाली विधायक गोविंद ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार तीन साल से लोगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि एनजीटी में मजबूती से पक्ष न रखने के कारण ही लोग इन समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह घाटी के लोगों की समस्याएं विधानसभा में प्रमुखता से उठाएंगे।