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शरची में धूमधाम से मनाया पडे़ई उत्सव

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संवाद न्यूज एजेंसी
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गुशैणी (कुल्लू) देवभूमि कुल्लू में देवी-देवताओं के मेले एवं त्यौहारों की धूम है। देवताओं में सम्मान में आयोजित पारंपरिक मेलों में प्राचीन संस्कृति देखने को मिल रही है।
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बंजार की तीर्थन घाटी में भी हर वर्ष की भांति अलग-अलग गांव में 14 से 21 अप्रैल तक परंपरागत बैसाखी मेलों का आयोजन होता है। शरची गांव में सोमवार को पडे़ई उत्सव मनाया गया। इस उत्सव में न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि पर्यटकों ने भी लुत्फ लिया। पडे़ई मेले की शुरुआत घाटी की आराध्य देवी माता गाड़ादुर्गा के आगमन से हुई। लोगों ने माता गाड़ादुर्गा को फूल अर्पित कर सुख व समृद्धि की कामना की। साथ ही उनसे आशीर्वाद लिया। इस पडे़ई उत्सव में करीब 50 फीट लंबे पेड़ को जंगल से लाकर मेला स्थल में खड़ा किया, जो आकर्षण रहा। देव परंपरा को निभाने के लिए शरची व जमाला गांव के ग्रामीण जंगल में जाकर एक पेड़ को काटकर लाते है, जिसे सैकड़ों लोगों की ओर से ढोल-नगाड़ों के साथ लाया जाता है। इसके बाद देव स्थल पर पहुंचने के बाद इसे देव रीति रिवाजों के आधार पर खड़ा किया जाता है। इसको देखने के लिए आसपास गांव के हजारों लोग जुटते हैं। माता के कारदार मुरारी शर्मा का कहना है कि यह उत्सव माता गाड़ादुर्गा के सम्मान में हर वर्ष मनाया जाता है। कोरोना काल के बाद इस साल उत्सव में भारी भीड़ रही।
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