जिला क्षेत्रीय अस्पताल में स्टाफ की कमी का खामियाजा यहां इलाज करवाने पहुंच रहे मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालत यह है कि यहां कुछ रोगों का एक-एक स्पेशलिस्ट है। इसके चलते इनको पहले दाखिल मरीजों को चेक करना पड़ता है, उसके बाद वे ओपीडी में बैठते हैं। इससे मरीजों को ओपीडी के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ता है।
गौरतलब है कि जिला अस्पताल में कुल्लू, मंडी, लाहौल-स्पीति सहित पांगी क्षेत्रों से सैकड़ों लोग यहां इलाज करवाने पहुंचते हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या घटने से जहां मरीजों को दिक्कत हो रही है, वहीं अस्पताल प्रबंधन को भी डॉक्टरों की संख्या घट जाने से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या पहले 37 थी, जो अब घटकर महज 27 रह गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी वाईडी शर्मा ने कहा कि अस्पताल में पहले के मुकाबले स्टॉफ काफी कम हो गया है। दस डॉक्टर कम होने से मरीजों के इलाज करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। शिशु रोग विभाग में एक ही डॉक्टर बच्चों का इलाज कर रहा है।
ईएनटी और स्किन के डॉक्टर भी एक-एक हैं। इसके अलावा हड्डी रोग के जहां पहले चार डॉक्टर थे, अब सिर्फ दो रह गए हैं। जनरल एमबीबीएस डॉक्टरों की संख्या भी घटकर पांच रह गई है। उन्होंने कहा कि एक विभाग में एक ही डॉक्टर होने के कारण डॉक्टर को पहले राउंड पर जाना पड़ता है, उसके बाद ही ओपीडी में मरीजों को चेक करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के खाली पदों को भरने के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।