कुल्लू के अतिदुर्गम प्राचीन गांव मलाणा में फागली उत्सव के दौरान लकड़ी की मशाल का कंधों पर उठाकर
कुल्लू। जिले के ऐतिहासिक गांव मलाणा में देवता जमलू ऋषि के सम्मान में फागली उत्सव मनाया गया। मलाणा में वाद्ययंत्रों के बीच फागली की परंपरा का निर्वहन किया गया। भारी संख्या में श्रद्धालु भी मलाणा में फागली में चाकरी देने के लिए पहुंचे।
फागली में सबसे पहले देवता जमलू ऋषि के भंडार से ढोल नगाड़ाें के साथ देवता जमलू ऋषि के नरसिंगे, करनाल सहित अन्य निशान माता रेणुका के मंदिर में लाए गए। इसके बाद यहां से लकड़ी की करीब 10 से 15 फीट लंबी मशाल को निकाला गया। जलती हुई मशाल के साथ देवता जमलू ऋषि के कारकून एक निश्चित स्थान पर पहुंचे।
यहां पर देव परंपरा का निर्वहन किया गया। इस दौरान पूरा गांव वाद्ययंत्रों की स्वरलहरियों से गूंज उठा। मलाणा को जमलू ऋषि के 12 देउघरों में से प्रमुख स्थान माना जाता है। यहां पर अभी भी देव नियमों का आदेश चलता है।
यहां पर जाने वाले पर्यटकों और अन्य लोगों को देव नियमों का पालन करना होता है। ऐसा न करने पर उन्हें जुर्माना भी देना पड़ता है। मलाणा पंचायत के प्रधान राजू राम ने कहा कि देवता जमलू का फागली पर्व प्रमुख त्योहारों में से एक है। फागली में मलाणा गांव की महिलाएं पारंपरिक परिधान में नृत्य करेंगी। संवाद