कुल्लू जिले में भी गर्मी पड़ने से लोग बेहाल, 32 डिग्री से ज्यादा पहुंच रहा तापमान
ग्लेशियर पिघलने से बढ़ा जिले नदी-नालों का जलस्तर, लोग घरों में दुबकने पर मजबूर
खेत-खलिहानों से जाने से परहेज कर रहे किसान-बागवान, सुबह-शाम कर रहे काम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जून के पहले पखवाड़े में पहाड़ भी तपने लगे हैं। मौसम के लगातार परिवर्तनशील रहने से अधिक गर्मी महसूस हो रही है। दिन के समय भीषण गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया। दिन के समय पारा 32 डिग्री या इससे अधिक जा रहा है।
गर्मी का असर अब साफ दिखने लगा है। नदी-नालों का जलस्तर काफी बढ़ गया है। गर्मी के चलते ग्लेशियर पिघल रहे हैैं। इससे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। गर्मी के चलते लोग भी दिन को अपने घरों में ही दुबक रहे हैं। कुल्लू जिले के भुंतर में गर्मी का सबसे अधिक असर है। कुल्लू और भुंतर के बाजार में रविवार को रौनक गायब रही। ढालपुर मालरोड पर व्यापारियों ने अस्थायी संडे मार्केट लगाई थी, लेकिन गर्मी के असर के चलते रौनक कम ही देखने को मिली। ढालपुर में लोगों ने पेड़ों की छांव के नीचे ठंडी हवा में ठंडक महसूस की।
शहर में लोग गर्मी से बचने के लिए शीतल पेय के साथ पंखों का सहारा ले रहे हैं। किसान और बागवान भी अब अपने खेत-खलिहानों का सुबह और शाम को ही रुख कर रहे हैं। किसान देवराज शर्मा और ओमप्रकाश ने कहा कि खुलकर बारिश न होने से गर्मी बढ़ रही है। तीन से चार दिन बाद हल्की बूंदाबांदी होती है, जबकि बादल जमकर नहीं बरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर आने वाले दिनों में भी बारिश नहीं होती है तो गर्मी का असर और बढ़ेगा।
ग्लोबल वार्मिंग के असर से मौसम में बदलाव आ रहा है। पहाड़ों में ठंडक रहती थी। अब यहां भी पारा चढ़ने लगा है। पर्यावरण संतुलित करने का एकमात्र विकल्प पौधरोपण है। - किशन लाल, पर्यावरणविद्व, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता
नदी-नालों से दूर रहें पर्यटक और स्थानीय लोग
ब्यास नदी और इसकी सहायक नदियों में जलस्तर बढ़ने के कारण लारजी बांध से पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में नदी के किनारों में न जाएं।