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Kullu News: कुल्लू में ही होगा मानसिक तौर पर अस्वस्थ मरीजों का उपचार

Thu, 06 Feb 2025 10:14 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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अब नहीं लगाने होंगे आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ के चक्कर
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साइकोलॉजिस्ट डॉ. नेहा ने संभाला कार्यभार, चार जिलों को मिलेगी सुविधा

राजीव नैय्यर
कुल्लू। मानसिक तौर पर अस्वस्थ मरीजों का उपचार अब क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में होगा। मरीजों और तीमारदारों को अब आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार और स्वास्थ्य निदेशालय ने जिले में साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति कर दी है।
गौर रहे कि जिला मुख्यालय में स्थित क्षेत्रीय अस्पताल में जिला कुल्लू, लाहौल-स्पीति के अलावा जिला मंडी और चंबा के सीमावर्ती क्षेत्रों के मरीज उपचार करवाने पहुंचते हैं। अस्पताल में साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति होने से चार जिलों के मानसिक तौर पर अस्वस्थ मरीजों को गृह क्षेत्र के पास ही उपचार सुविधा मिलेगी। उन्हें उपचार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनआर पवार ने कहा कि जिले में मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति होने से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि साइकोलॉजिस्ट डॉ. नेहा शर्मा ने अस्पताल में सेवाएं शुरू कर दी हैं।
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पीजीआई चंडीगढ़ से की है पीजी
साइकोलॉजिस्ट डॉ. नेहा शर्मा ने पीजीआई चंडीगढ़ में साल 2022 से 2024 के बीच पीजी की है। इससे पहले अपने गृह जिला बिलासपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मारकंड में बतौर चिकित्सक साल 2018 से 2021 तक सेवाएं दी हैं। अब डॉ. नेहा शर्मा क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में बतौर साइकोलॉजिस्ट मरीजों का उपचार करेंगी।

ओपीडी में आठ से दस मरीजों की संख्या
सरकार की ओर से नियुक्ति आदेश के बाद साइकोलॉजिस्ट ने क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में अपनी सेवाएं शुरू कर दी हैं। साइकोलॉजिस्ट ओपीडी के शुरुआती दिनों में ही रोजाना की ओपीडी भी आठ से दस के बीच चल रही है। मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है।


नशे से मुक्ति में मिलेगी मदद
क्षेत्रीय अस्पताल में साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति होने से नशे की चपेट में आए लोगों खासकर युवाओं की काउंसलिंग भी साइकोलॉजिस्ट करेंगी। इससे जिले के प्रवेश द्वार भुंतर में स्थित नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र पर से भी मरीजों का दबाव कम होगा। अस्पताल में काउंसलिंग सुविधा होने से मरीजों को नशे से मुक्ति मिलेगी और युवा स्वास्थ्य होकर स्वरोजगार में अपना भविष्य तलाशेंगे।
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उपचार पर खर्च होती थी मोटी रकम
जिला में साइकोलॉजिस्ट न होने से उपचार पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही थी। मानसिक तौर पर अस्वस्थ मरीज को उपचार के लिए परिजनों को जिला से बाहर ले जाना पड़ता था। ऐसे में उपचार के अलावा स्वास्थ्य संस्थान तक जाने और वापस आने में अतिरिक्त खर्चा हो रहा था।
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