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Kullu News: मरौड़ गांव में न सड़क न बिजली, जेनरेटर से रोशन हो रहीं शादियां

Sat, 13 Dec 2025 10:43 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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सैंज का अतिदुगर्म गांव का मरोड़ गांव का फाइल फोटो
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आजादी के 78 साल बाद भी कुल्लू की सैंज घाटी के मरौड़ गांव में नहीं जला बल्ब
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ग्रामीण बोले- सरकार और बिजली बोर्ड से समस्या तो उठाई लेकिन समाधान नहीं मिला
महेंद्र पालसरा
न्यूली (कुल्लू)। देश आजादी के 78 साल पूरे कर चुका है। शहरों में रातें रोशनी से चमकती हैं लेकिन सैंज घाटी का मरौड़ गांव आज भी अंधेरे में सांस ले रहा है।
यहां न सड़क है, न बिजली और न ही सरकारी दावों की रोशनी। खुशी के मौके भी यहां संघर्ष बन जाते हैं। शादी हो या कोई समारोह जेनरेटर की रोशनी से उजाला होता है। आधुनिक भारत के बीच खड़ा यह गांव व्यवस्था की सबसे गहरी नाकामी की तस्वीर पेश करता है। मरौड़ गांव में आज तक बिजली का बल्ब नहीं जला है।
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गांव के युवा राजपाल ने सरकार, प्रशासन और बिजली बोर्ड की अनदेखी से परेशान होकर अपनी शादी के लिए जेनरेटर बुक किया और शादी के पलों को यादगार बनाया। युवा को अपनी शादी के लिए सैंज बाजार से जेनरेटर ले जाना पड़ा जिससे ताकि शादी समारोह में मेहमानों और उनकी खातिरदारी में लगे ग्रामीणों को अंधेरे के चलते दिक्कतों का सामना न करना पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सरकार, प्रशासन और बिजली बोर्ड के समक्ष समस्या उठाई है लेकिन दशकों से समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि आयोजन और समारोह करने की खुशी कम और परेशानी अधिक रहती है। बिना बिजली कामकाज निपटाने में भी दिक्कतें पेश आती हैं। आधुनिक युग में भी टॉर्च और मोमबत्ती से घरों को रोशन करना पड़ता है। उधर, बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता जितेंद्र बिष्ठ ने कहा कि मरौड़ गांव तक बिजली पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क से अनुमति मिलने के बाद आगामी कार्य शुरू किया जाएगा।

आयोजन और समाराेह में बिना बिजली परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में मेहमानों को खाना खिलाने में दिक्कत पेश आती है। मुझे अपनी शादी में जेनरेटर की व्यवस्था करनी पड़ी। इसे सैंज से गांव तक पहुंचाने में भी ग्रामीणों को समस्याओं से जूझना पड़ा है। -राजपाल
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आधुनिकता के इस दौर में भी ग्रामीणों को सदियों पीछे धकेला जा रहा है। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं हो रही हैं। गांव में न सड़क है और न बिजली। इस वजह से आयोजन और समारोह मनाने में खलल पड़ जाता है। इसके अलावा रोजाना परेशानी उठानी पड़ती है। -महेश
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