कुल्लू। जिला कुल्लू की सबसे बड़ी बंदरोल सब्जी मंडी इस बार भी तंबूओं में चल रही है। विश्व बैंक की मदद से करीब 17 करोड़ की लागत से बना बंदरोल सब्जी मंडी का मार्किट यार्ड का व्यापारियों और आढ़तियों को लाभ नहीं मिला पाया। पांच मंजिला भवन में व्यापारियों के लिए 68 दुकानें भी बनी हैं। मगर सूबे में आई आपदा के कारण न तो इसका उद्घाटन हो सका और न ही दुकानों की नीलामी हो पाई। ऐसे में बंदरोल मंडी में करोड़ों के सेब का कारोबार इस बार भी तंबुओं में हो रहा है।
जिला की सबसे बड़ी सब्जी मंडी बंदरोल में इन दिनों सेब की सीजन यौवन पर चल रहा है। हालांकि जिले में 70 से 80 फीसदी तक सेब का सीजन सिमट चुका है। बावजूद इसके मंडी में रोजाना 30 से 40 हजार सेब के क्रेट पहुंच रहे हैं। बागवानों को अपना उत्पाद को खुले में बेचना पड़ रहा है। वहीं, व्यापारी भी करीब एक दशक से मार्केट यार्ड में अपना कारोबार शुरू करने का इंतजार कर रहे हैं।
बागवान शेर सिंह, मोहर सिंह, गीता नंद और प्रदीप सिंह का कहना है कि बंदरोल सब्जी मंडी में मार्केट यार्ड बनकर तैयार हो गया है। फिर भी बागवान अपने सेब को खुले आसमान के नीचे तंबुओं में बेचने को मजबूर हैं। तंबूओं में बागवानों के साथ व्यापारियों, आढ़तियाें और लदानियों को बारिश व धूप में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
वहीं, बंदरोल के पास कुल्लू-मनाली हाईवे तीन के दोनों तरफ खुले में मंडी चलने से यहां जाम भी लग जाता है। बागवानों का कहना है कि मंडी का यार्ड बनकर तैयार है। ऐसे में सरकार और एपीएमसी को जल्द इसका उद्घाटन करना चाहिए, ताकि बागवानों, व्यापारियों और आढ़तियों को इसका लाभ मिल सके।
मार्केट यार्ड बनकर तैयार हो गया है। आपदा के कारण इसका उद्घाटन नहीं हो सका है। अगले सीजन में किसान-बागवानों के साथ व्यापारियों और आढ़तियाें को इसका लाभ मिलेगा।
- शगुन सूद, सचिव, एपीएमसी