लाहौल के तुपचिलिंग गोंपा में कार्यक्रम, बुरी आत्माओं को भगाया
लामाओं ने किया मुखौटा नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र लाहौल के तुपचिलिंग गोंपा में शुक्रवार को जांस्कर के बरदन गोंपा से आए लामाओं ने मुखौटा नृत्य किया। विश्व शांति, खुशहाली और समृद्धि के लिए आयोजित मुखौटा नृत्य देखने काफी संख्या में लोग उमड़े। लामाओं ने यमदूत नृत्य, तुरदक, महाकाला का आठ रूपीय नृत्य जिसमें आठ लामाओं ने एक साथ मुखौटा नृत्य, जोरछम और नछम नृत्य किया।
बरदन गोंपा में तैनात लामा आचार्य रिगज़िन संफेल ने बताया कि छम नृत्य एक पारंपरिक तिब्बती नृत्य है, जो तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं की ओर से किया जाता है। यह नृत्य धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों के दौरान किया जाता है। बौद्ध भिक्षुओं ने विभिन्न मास्क और पारंपरिक पोशाकें पहन कर तुपचिलिंग में बुरी आत्माओं को भगाने के साथ ही पूजा पाठ और संगीत के साथ सुंदर मुखौटा नृत्य किया।
रूस से आए एक्ज़ोटिक ग्रुप की महिलाओं ने भी छम नृत्य का लुत्फ लिया और इसकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि छम नृत्य का मुख्य उद्देश्य बुरी आत्माओं को दूर करना, धर्म को बढ़ावा देना और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करना है। छम नृत्य तिब्बती संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और दुनियाभर में इसकी सराहना की जाती है। तांदी डाइट की जेबीटी प्रशिक्षु छात्राओं और सुशील ने भी प्रस्तुति दी। संवाद