रघुपुरगढ़, सरयोलसर और जलोड़ी दर्रा में बिजली-पानी के साथ शौचालय की सुविधा तक नहीं
रघुपुरगढ़ में रही कैंपिंग संचालकों को कई किलोमीटर दूर से ढोकर लाना पड़ रहा है पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। पर्यटक नए-नए पर्यटन स्थलों को निहारने के लिए पहुंच रहे हैं। रघुपुरगढ़, सरयोलसर और जलोड़ी दर्रा की वादियों में हजारों पर्यटक सैर-सपाटा करने आ रहे हैं, मगर इन पर्यटन स्थलों में पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
बिजली-पानी के साथ शौचालय की भी उचित व्यवस्था नहीं है। इससे सैलानियों को परेशान होना पड़ रहा है। यहां कारोबार करने के लोगों को भी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। तीनों पर्यटन स्थल कुल्लू जिले के आनी और बंजार की सीमा पर हैं। 10,280 से 11,000 फीट ऊंचे इन स्थलों को प्रकृति ने प्राकृतिक सौंदर्य से नवाजा है। चारों तरफ जंगल और बीच में हरी-भरी वादियां देसी-विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। पूर्व भाजपा सरकार ने इन स्थलों को विकसित करने के लिए ...नई मंजिलें, नई राहें योजना चलाई थी, लेकिन कुछ नहीं हो पाया है। अब कांग्रेस सरकार ने इको टूरिज्म साइट के तहत विकसित करने की बात कही है।
जलोड़ी दर्रा में कारोबारियों के लिए दुकानें और पार्किंग की व्यवस्था तो है, मगर पानी और बिजली का अभाव है। पिछले दिनों इको टूरिज्म डेवलपमेंट सोसायटी ने अपने स्तर पर सैलानियों और कारोबारियों की सुविधा के लिए पानी पहुंचाया गया है। जलोड़ी दर्रा से करीब तीन किलोमीटर रघुपुरगढ़ में न तो बिजली है और न ही पानी की सुविधा। यहां चल रही कैंपिंग संचालकों को कई किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। यही हाल सरयोलसर का है, जहां वन विभाग ने एक मार्केट का निर्माण किया है, मगर बिजली नहीं पहुंची है। भीम सिंह, जगदीश ठाकुर और विकास कुमार ने कहा कि शौचालय न होना सबसे बड़ी समस्या है। कूड़ेदान भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 2024 में इन तीन पर्यटन स्थलों में करीब तीन लाख सैलानी पहुंचे थे। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है।
जलोड़ी से रघुपुर और सरयोलसर ट्रैक में सार्वजनिक शौचालय और कूड़ेदान का होना बहुत जरूरी है। पानी और बिजली की व्यवस्था भी उपलब्ध करवानी चाहिए। जलोड़ी में बंजार की तरफ नो पार्किंग जोन बनाया जाए। पार्किंग न होने से जाम लग जाता है। - राम लाल अध्यक्ष इको टूरिज्म डेवलपमेंट सोसायटी
रघुपुरगढ़ को इको टूरिज्म के तहत विकसित कर यहां बिजली, पानी और शौचालय की व्यवस्था की जाए। यहां पहुंचने वाले सैलानियों को सुविधा प्रदान करने के लिए युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें कई किमी दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। - सुनील कुमार, पर्यटन कारोबारी