अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के लिए बाह्य सराज के देवी-देवताओं ने हामी भर दी है। जिला के बाह्य सराज आनी-निरमंड के दस देवी देवताओं ने दशहरा में आने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। दशहरा के लिए जिला के सबसे अमीर देवता माने जाने वाले खुडीजल, ब्यास ऋषि, टकरासी नाग, कोट पझारी, देवता चंभू रंदल, सप्त ऋषि और चंभू कशोली आदि लाव लश्कर के साथ दशहरा में भाग लेंगे। इसके लिए देवताओं के कारकूनों ने तैयारियों जोरों पर शुरू की दी हैं। सफर लंबा होने से बाह्य सराज के देवी-देवता दशहरा से चार-पांच पूर्व ही कुल्लू की ओर रवाना हो जाएंगे। उधर, देवी देवता के हरियानों, कारकूनों व देवलुओं ने दशहरा में बाह्य सराज आनी-निरमंड के देवी देवताओं को एक साथ ठहराने की मांग की है।
एपीएमसी कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति के अध्यक्ष यूपेंद्रकांत मिश्रा ने कहा कि दशहरा पर्व में बाह्य सराज खासकर निरमंड और पंद्रह बीस इलाके से आने वाले देवी-देवताओं के ठहराव को लेकर भेदभाव किया जाता है। निरमंड के देवी-देवताओं को ऐसी जगह पर रखा जाता है जहां पर ढंग से टेंट को भी लगाना भी मुश्किल हो जाता है। देवी देवताओं के कारकूनों, हरियानों व देवलुओं को ठहरना तो दूर अस्थायी शिविर में देव रथों को रखना भी एक चुनौती बन जाता है। उन्होंने दशहरा में जहां आनी के देवी-देवता बैठते हैं निरमंड के देवी-देवताओं को भी वहां ठहराया जाए जिससे देवलुओं का अच्छी सुविधा के साथ एक दूसरे देवी-देवताओं की सुरक्षा भी बनी रहे। यूपेंद्र कांत मिश्रा, देवता खुडीजल के कारदार शेर सिंह, देवता चंभू रंदल के कारदार देवी सरण व चंभू कशोली के कारदार लीला चंद ने कहा कि निरमंड के देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों के पास न तो खाना बनाने को जगह होती है और न ही पेयजल की सुविधा। ऐसे में बाह्य सराज से आने वाले करीब एक दर्जन देवी-देवताओं को एक ही जगह ठहराया जाए। अगर उनकी मांगों पर गौर नहीं हुआ तो वह दशहरा में विरोध करेंगे और दशहरा के दौरान मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा।