रोहतांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के चंद्राघाटी के वामतट पर बसे गोंधला पंचायत के यांगला गांव के भरेंड नाला से ग्लेशियर गिरने से 100 मीटर के करीब सिंचाई कूहल को नुकसान पहुंचा है। ग्लेशियर गिरने से कूहल का मुख्य स्रोत 15 से 20 फीट नीचे दब गया है। इस कारण खेतों तक सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच रहा है।
स्थानीय किसान प्रदीप मालपा, इंद्रपाल, रमेश, ओम प्रकाश, प्रेम लाल और देवी चंद आदि ने बताया कि 19 अगस्त को भरेंड नाले में ग्लेशियर गिरने से यांगला के लिए बनी सिंचाई कूहल में पानी की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई है। इससे गोभी, मटर और अन्य फसल को नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है।
उन्होंने बताया कि फसल बिजाई के बाद मई में भी ग्रामीणों ने राशि इकट्ठा कर कूहल के 20 फीट गहरे मुख्य स्रोत से ग्लेशियर को निकालने के लिए मजदूर काम पर लगाए थे। अब फिर से ग्लेशियर आकर गिरा और संबंधित विभाग को सूचना देने के तीन दिन तक काम शुरू नहीं किया गया। ऐसे में अब ग्रामीण स्वयं इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि विधायक अनुराधा राणा को भी इसकी सूचना दे दी है। इसके बाद उन्होंने जलशक्ति विभाग को तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा है।
उधर, जलशक्ति विभाग केलांग के अधिशाषी अभियंता हरिप्रकाश भारद्वाज ने बताया कि विभाग ने शुरुआती दौर में यांगला सिंचाई के कूहल बनाने के लिए मजदूर भेजे थे। विभाग के पास मजदूरों की कमी चल रही है। ग्लेशियर के मलबे को काटने के लिए वीरवार से कुछ और मजदूरों को भेजा जाएगा।