संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले के क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू को दूसरा शिशु रोग विशेषज्ञ भी मिल गया है। इससे अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। अस्पताल के मातृ-शिशु खंड में अब गायनी के साथ-साथ शिशुओं का भी बेहतर उपचार होगा।
हालांकि पिछले चार माह से शिशु रोग विशेषज्ञ न होने के कारण ओपीडी में ताला लटक रहा था, लेकिन सरकार ने अब अस्पताल में दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति कर दी है। अस्पताल में अब दूसरे शिशु रोग विशेषज्ञ ने भी ज्वाइनिंग कर दी है। इससे बच्चों को बेहतर उपचार सुविधा मिलेगी।
गौरतलब है कि जिला मुख्यालय स्थित क्षेत्रीय अस्पताल में कुल्लू के अलावा लाहौल-स्पीति, मंडी और चंबा जिले के पांगी समेत साथ लगते अन्य क्षेत्र के लोग बच्चों के उपचार के लिए आते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण बीमार बच्चों को मेडिकल कॉलेज नेरचौक और आईजीएमसी शिमला के लिए रेफर कर दिया जाता रहा है, लेकिन अब इस बड़ी समस्या से परिजनों को निजात मिलेगी। उधर, इस संबंध में क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेश ने कहा कि अस्पताल में दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की ज्वाइनिंग हो गई है। अस्पताल की ओपीडी और उपचाराधीन बच्चों का उपचार होगा।
चिकित्सकों के लिए 40 दिनों तक दिया था धरना
जिला मुख्यालय स्थित कुल्लू अस्पताल में चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए सदर विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की अगुवाई में जनता ने धरना दिया था। यह धरना लगातार 40 दिनों तक जारी रहा। धरने के बाद ही सरकार ने अस्पताल में चिकित्सकों के खाली पद भरने शुरू किए हैं।
रेडियोलॉजिस्ट का पद अभी भी खाली
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में रेडियोलॉजिस्ट का पद अभी भी खाली चल रहा है, जिसके कारण गभर्वती महिलाओं को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है, जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड के 1,800 से 2,000 रुपये लिए जा रहे हैं।