लाहौल घाटी के विभिन्न स्थानों पर 63 स्कूली बच्चे हेलीकॉप्टर की नियमित उड़ानें न होने कुल्लू नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई मरीज भी फंसे हुए हैं। मरीजों और स्कूली बच्चों को घाटी से निकालने के लिए लाहौल-स्पीति के लोग जिला प्रशासन से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो रही है।
अभिभावक सुरेश कुमार, राकेश, महेश ने बताया कि हेलीकॉप्टर की नियमित उड़ानें नहीं होने से कुल्लू पढ़ने वाले लाहौल के बच्चे घाटी में ही फंसे हुए हैं और स्कूलों में प्रवेश तिथि के समय निकलता जा रहा है। भाजयुमो के जिलाध्यक्ष संजीव कुमार और वारपा पंचायत के प्रधान सतप्रकाश, तांदी पंचायत के प्रधान सुरेश कुमार ने कहा कि नियमित उड़ान नहीं होने से बच्चों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
पूर्व प्रधान सतप्रकाश ने स्थानीय विधायक, प्रशासन और सरकार पर ढुलमुल हवाई सेवा को सुचारू रूप से नहीं करवाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजयुमो के जिलाध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि गौंधला हेलीपैड के लिए अभी तक कोई भी उड़ान नहीं हुई है। इसी हेलीपैड में सात स्कूली बच्चे फंसे हुए हैं। इसके अलावा बारिंग में पांच, रावा में तीन, उदयपुर में तीन, तांदी डाइट में छह, जिस्पा में आठ, स्तींगरी में बीस, सिस्सू में दस, तिंगरेट में एक स्कूली बच्चा फंसा है। सतप्रकाश ने कहा कि हालांकि इस बार लाहौल घाटी में मौसम बिल्कुल ठीक चल रहा है। इसके बावजूद भी राज्य सरकार का हेलीकॉप्टर गायब ही रहता है।
वहीं, लाहौल के जनप्रतिनिधियों और बच्चों के अभिभावकों ने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की है कि लाहौल घाटी के लिए हेलीकॉप्टर की नियमित उड़ान की जाए ताकि लाहौल घाटी में फंसे बच्चे घाटी से बाहर निकल सकें और समय पर स्कूल में प्रवेश लेकर कक्षाएं लगा सकें। उधर, कुल्लू में तैनात उड़ान समिति के सह प्रभारी जीत सिंह धर्माणी ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को लाहौल घाटी के लिए हेलीकॉप्टर का कोई शेड्यूल नहीं है। मिली जानकारी के मुताबिक हेलीकॉप्टर दो दिनों तक प्रदेश मुख्यमंत्री के साथ दिल्ली गया है।