कुल्लू में शमशी स्कूल में नाटक का मंचन करते बाल कलाकार।-संवाद
कुल्लू। बाल कलाकारों ने लोभ और लालच से दूरी दर्शाते हुए अपने सधे अभिनय से दर्शकों को लोटपोट किया। राजकीय माध्यमिक विद्यालय शमशी में रंगसभा ग्रुप के बाल कलाकारों ने सोने का हंस नामक नाटक का मंचन किया। नारायण भक्त की ओर से लिखित तथा युवा रंगकर्मी परमानंद के निर्देशित नाटक में बाल कलाकारों ने बुरी आदतों को त्यागने का संदेश दिया।
नाटक में राजा की बेटी को सपना होता है, जिसमें उसने सोने के हंस को देखा। वह राजा से उस हंस को लाने के लिए कहती है। जब राजा कहता है कि यह बुरा सपना था, तो राजकुमारी रूठ जाती है। अंतत: राजा मजबूर होकर अपने दूतों को आदेश देता है कि जाओ ऐसा आदमी ढूंढ के लाओ जो इसे सोने का हंस लाकर देगा। ऐसे आदमी को आधा राज्य दे दूंगा।
दूतों को रास्ते में एक युवक मिलता है और वे उसे कहानी बता देते हैं। युवक तमाम मुश्किलों को झेलते हुए हंसों की नगरी में पहुंच जाता है और हंस के लिए अपना बलिदान देने के लिए भी तैयार हो जाता है। उसकी बहादुरी देखकर हंसों की नगरी की शक्तियां प्रसन्न होती हैं और उसे हंस दे देती हैं।
राजकुमारी हंस को देखकर खुश हो जाती है और राजा अपने ऐलान अनुसार उसे अपना आधा राज्य देने के लिए तैयार हो जाता है, लेकिन युवक राज्य लेने से इंकार कर देता है। कहता है कि मैं तो एक साधारण आदमी हूं और साधारण आदमी जैसा ही जीना चाहता हूं। नाटक में हिमांशू, पारस, राज, सागर, कृष, रघुवीर, गौरव, खेमराज, तबस्सुम, मानवी, परी, तान्या और अनोखा आदि बाल कलाकारों ने अपनी अभिनय प्रतिभा दिखाई। संवाद