केलांग (लाहौल-स्पीति)। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान जलवायु परिवर्तन की वजह से पानी के सूखे हुए चश्माें के पुनरुद्धार के लिए वारपा पंचायत में परियोजना चला रहा है। इसके तहत चश्मों के संरक्षण के लिए एक मॉडल विकसित किया जा रहा है। अगर यह सफल हुआ तो अन्य स्थानों पर भी यह मॉडल विकसित किए जाएंगे।
संस्थान के वैज्ञानिकों ने अलग-अलग गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। जीबी पंत संस्थान के वैज्ञानिक तथा परियोजना के मुख्य अन्वेषक वैभव ने स्थानीय लोगों को पर्वतीय भू-विज्ञान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि चश्मों के पुनरुद्धार के लिए अनूठा मॉडल विकसित होगा। वारपा पंचायत में एक पेड़ मां के नाम के तहत 50 पौधे रोपे गए। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी अनिकेत वानवे, शोधार्थी डॉ. भीम चंद, सह अन्वेषक डॉ. सरला शाशनी आदि मौजूद रहे। संवाद