महाविद्यालय बंजार के एनसीसी कैडेट और रोवर-रेंजर एकत्रित किए कूड़े के साथ। -संवाद
बंजार (कुल्लू)। भारतीय पुराणों में नदियों को मातृ स्वरूप माना गया है, जो प्रकृति में हर एक जीव को पोषण प्रदान करती हैं। नदियां भारतीय संस्कृति की जननी, वाहक और पोषक हैं। इनकी विभिन्न रूपों में पूजा होती है। नदियों का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है। यह बात राजकीय महाविद्यालय बंजार की संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता ने कही। कॉलेज में एनसीसी इकाई ने भारतीय नदियां संस्कृति की जननी विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया।
इसमें प्राचार्य डॉ. रेणुका थपलियाल भी मौजूद रहीं। डॉ. हेमलता ने कहा कि पुराणों में नदियों और तीर्थों की उपयोगिता पर गहन अध्ययन कर विद्यावाचस्पति की उपाधि प्राप्त की है। एनसीसी और रोवर-रेंजर्स के संयुक्त तत्वावधान में स्वच्छता की भागीदारी कार्यक्रम भी किया गया। महाविद्यालय के निकट बहने वाली खाडागाड़ खड्ड के किनारे जमा प्लास्टिक और अन्य कचरे को एकत्रित किया। इसमें नगर पंचायत बंजार ने भी अपनी भागीदारी निभाई।
प्राचार्य डॉ. रेणुका थपलियाल ने बताया कि सफाई अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इसमें 39 एनसीसी कैडेट्स, आठ रोवर और 12 रेंजर्स ने भाग लिया। इस दौरान एनसीसी सीटीओ प्रो. टीकम राम, रोवर्स लीडर प्रो अंशुल शर्मा, रेंजर लीडर डॉ. हेमलता और नगर पंचायत के कनिष्ठ अभियंता गोपाल, हितेश आदि उपस्थित रहे। संवाद