सैंज (कुल्लू)। अमूमन सर्दियों में दस्तक देने वाले प्रवासी परिंदे इस बार चार महीने देरी से लारजी झील में पहुंचे हैं। आपदा में आई बाढ़ के बाद लारजी परियोजना प्रबंधन ने झील को खाली कर दिया था। इसके बाद झील सुनसान की लग रही थी। मगर अब परियोजना ने झील में पानी भर दिया है और कृत्रिम झील में विदेशी सारस प्रजाति के पक्षियों ने दस्तक दे दी है।
जलाशय में कई दुर्लभ प्रजाति के परिंदे सैलानियों और आम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। लारजी जल विद्युत परियोजना की झील में रंग बिरंगे विदेशी परिंदों ने दस्तक दे दी है। खास बात यह है कि जलाशय में कई दुर्लभ प्रजाति के परिंदे देखे जा रहे हैं। बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही हजारों किलोमीटर दूर से आकर कुल्लू जिला की कृत्रिम झील विदेशी मेहमान परिंदों से गुलजार हुई है।
साइबेरिया, रूस और कजाकिस्तान आदि देशों के विदेशी पक्षियों ने यहां डेरा डाल दिया है। वन्य प्राणी विभाग के विशेषज्ञ कहते हैं कि विदेशी पक्षियों का सफर इतना आसान नहीं होता है। रास्ते में बहुत सी मुश्किलें आती है। आंधी, तूफान और तेज हवाओं से कई पक्षी अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं।
उल्लेखनीय है कि साइबेरिया और रूस आदि देश बहुत ही ठंडी जगह है। जहां नवंबर से मार्च तक तापमान 50 से 60 डिग्री नीचे तक चला जाता है इस कारण पक्षियों का जिंदा रहना बहुत मुश्किल हो जाता है, ऐसे में हजारों पक्षी भारत की ओर रुख करते हैं। सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ पेड़ पौधों के बीच से निकलकर ये पक्षी स्वच्छ पानी में अठखेलियां करने लगते हैं।
विदेशी परिंदों के दस्तक देते ही घाटी के पर्यावरण प्रेमी खुश नजर आ रहे हैं। वन्य प्राणी विभाग से सेवानिवृत अधिकारी जोगिंद्र सिंह ने बताया कि इन प्रवासी मेहमानों का मुख्य भोजन जलीय वनस्पति, जलीय कीट तथा छोटी मछली ही होता है, जबकि उनका प्रजनन का समय अप्रैल-मई के दौरान होता है। उन्होंने बताया कि यह प्रवासी परिंदे हजारों की संख्या में नजर आएंगे, जो हवा में उड़ते हैं और पानी में तैरते हैं। यह पक्षी झील में गहरा गोता लगाकर मछलियों का आहार बनाते हैं।
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के एसीएफ हंस राज ने बताया कि हर वर्ष देश विदेश से सैकड़ों पक्षी पहुंचते हैं तथा इन विदेशी मेहमानों की सुरक्षा की जा रही है। कहा कि कोई नया पक्षी तो नहीं आया है इस पर नजर रखी जा रही है।