सैंज (कुल्लू)। बरसात में बाढ़ से नदी किनारे बसे सैंज बाजार में भारी तबाही का खतरा है। बाजार को बाढ़ से बचाने के कोई पुख्ता प्रबंध न होने से लोगों में निराशा है। पार्वती जल विद्युत परियोजना का सिउंड बांध बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि बाजार को संभावित खतरे से बचाने के लिए नदी का योजनाबद्ध तरीके से तटीकरण किया जाएगा। लेकिन नदी के साथ सटे बाजार की सुरक्षा अभी भी रामभरोसे है।
520 मेगावाट की पार्वती परियोजना में 2013 से उत्पादन शुरू हो चुका है। सरकार हर वर्ष यहां से करोड़ों रुपये की रॉयल्टी ले रही है। परियोजना प्रबंधन को अरबों का मुनाफा हो रहा है। परियोजनाओं के निर्माण के दौरान सैंज बाजार में नदी किनारे कई दुकानें और रिहाइशी मकान बने हैं। ऐसे में जलस्तर बढ़ने पर यहां तबाही का सामना करना पड़ सकता है। व्यापार मंडल सैंज के उप प्रधान जीतराम ठाकुर और संयोजक गोविंद ठाकुर ने कहा कि सैंज बाजार में करीब 250 दुकानें व मकान हैं। बरसात में बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। टनलों में तकनीकी खराबी आने पर भी बांध के गेट खोल दिए जाते हैं। बाजार में नुकसान की संभावना बनी रहती है। पिछले साल बांध से छोड़े गए पानी से नदी के किनारे भूमि कटाव हुआ है। इससे सड़क टूट रही है। दुशाहड़ पंचायत प्रधान सीता देवी, धाउगी की प्रधान विमला देवी, रैला के प्रधान जोगिंद्र सिंह, मीरा देवी, व्यापारी राजीव लोचन, श्याम सुंदर शर्मा, मनोहर लाल, मोती राम, अमर सिंह, टेढ़ी सिंह और अशोक कुमार ने कहा कि सैंज बाजार और आसपास के क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित करने की लंबे समय से मांग की जा रही है। उधर, एनएचपीसी के महाप्रबंधक विक्रम सिंह ने कहा कि बांध से खतरे की कोई संभावना नहीं है। सारी स्थिति देखने के बाद ही बांध का निर्माण किया गया है। एसडीएम बंजार हेम चंद वर्मा ने कहा कि नदी किनारे बसे बाजार के बचाव के लिए योजना तैयार की जा रही है।