यह पहला मौका है कि प्रदेश के शाक्टी-मरोड़ और शुगाड़ जैसे दुर्गम गांवों को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। हालांकि, गाड़ापारली पंचायत के तहत आते इन दुर्गम गांवों को आज तक पंचायत का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला है। इस बार शाक्टी-मरोड़ के भाग चंद को इस पंचायत का प्रधान नियुक्त किया गया है।
ऐसे में शाक्टी-मरोड़ ही नहीं बल्कि इसके साथ लगते शुगाड़ जैसे दुर्गम गांवों के लोगों को भाग चंद से काफी उम्मीदें हैं। लोगों को उम्मीद है कि दशकों से समस्याएं झेल रहे ग्रामीणों की पैरवी करने में भाग चंद खरा उतरेंगे। भाग चंद के लिए भी यह पांच साल चुनौती भरे होंगे। हालांकि, लोगों ने भाग चंद पर विश्वास दिखाकर उन्हें पंचायत प्रधान की पदवी सौंपी दी है। लेकिन, अब भाग चंद उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं, यह तो आने वाले पांच साल ही बता पाएंगे। बहरहाल पंचायत की जनता ने इन दुर्गम गांवों को इस बार प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया है। गौरतलब है कि ये गांव नेशनल ग्रेट हिमालयन पार्क में आते हैं। यहां पर समस्याओं का अंबार है। यह गांव सड़क सुविधा से भी दूर हैं। अभी तक यहां बिजली तक नहीं पहुंची है।
आजादी के दशकों बाद भी हिमाचल प्रदेश के ये गांव बिजली सुविधा से कोसों दूर हैं। आजादी के इतने दशक बीत जाने के बावजूद लोग ज्यादातर लैंप का सहारा ले रहे हैं। शुक्रवार को पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण में गाड़ापारली पंचायत में हुए चुनाव में पहली बार शाक्टी-मरोड़ गांव का भाग चंद प्रधान बना है। गाड़ापारली पंचायत में साढ़े पांच सौ से अधिक मतदाता हैं। शाक्टी-मरोड़ और शुगाड़ गांव में कुल 79 के करीब मतदाता हैं। इसके बावजूद भाग चंद ने जीत हासिल की। भाग चंद की जीत से अति दुर्गम गांवों के ग्रामीण बेहद खुश हैं। ग्रामीण हीरा सिंह और शाड़ी देवी का कहना है कि अब उन्हें विकास की उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि आज तक किसी भी राजनेता ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि पहली बार उनके गांव में प्रधान बना, यह उनके लिए बहुत बड़ी बात है।