आजकल घाटी के बागवान सेब सहित अन्य फलदार पौधों की काटछांट में मशगूल हैं। बेहतर उत्पादन के लिए फलदार पौधों की प्रूनिंग तकनीक उम्दा किस्म की होनी अति आवश्यक है। ऐसे में फलों का आकार और गुणवत्ता अव्वल होती है। अक्सर देखा गया है कि बागवान इस कार्य में ज्यादा एहतियात नहीं बरतते हैं, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ता है। पौधों की टहनियों पर लगा एक गलत कट भी उत्पादन और गुणवत्ता पर प्रभाव डाल सकता है। लिहाजा, बागवानों को अपने बगीचों की काटछांट प्रशिक्षित व्यक्तियों से ही करवाना अति आवश्यक है।
काटछांट करते समय पौधे की रोग ग्रस्त टहनियों को भी काट देना चाहिए। जानकारों की मानें तो सेब बगीचों की प्रूनिंग प्रशिक्षित व्यक्ति से ही करवानी चाहिए। किस्म के अनुरूप काटछांट का कार्य करना लाजिमी है। गलत तरीके से प्रूनिंग का कार्य किया तो इसका प्रभाव सेब की पैदावार पर पड़ता है। प्रगतिशील बागवान एवं पूर्व विधायक चंद्रसेन ठाकुर कहते हैं कि प्रूनिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिससे बागवान पौधे के वांछित विकास और गुणवत्ता युक्त फसल को प्राप्त कर सकते हैं। बागवान अमित, चमन, चंदेराम, अशोक ठाकुर, चुनी राम, राजीव शर्मा, रामनाथ, देवराज आदि का कहना है कि इन दिनों बगीचों में प्रूनिंग का कार्य तेजी से चल रहा है।
प्रूनिंग के बाद चौबाटिया पेंट भी लगाया जा रहा है। बागवानी विभाग के उप निदेशक आरएल शर्मा का कहना है कि सेब की सामान्य किस्म और स्पर किस्मों की प्रूनिंग करने की तकनीक अलग-अलग है। स्पर किस्म में दो इंच में बीमे हटाए जाएं तो फल का आकार स्माल होगा। यदि चार इंच में बीमे हटाएं तो फल का आकार मीडियम होगा। छह इंच में बीमे हटाएं जाते हैं तो फल का आकार लार्ज होगा। उन्होंने कहा कि बागवानों को महकमा समय-समय पर शिविरों के माध्यम से प्रशिक्षण भी देता है।