संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली (कुल्लू)। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल मनाली में बस अड्डे की हालत बहुत खराब है। पर्यटकों और आम यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह बस अड्डा छोटा पड़ गया है।
आलम यह है कि अड्डे में बस का इंतजार करने के लिए यात्रियों को बैठने तक की पर्याप्त सुविधा नहीं है। यात्रियों के लिए लगाए गए बेंच कम पड़ रहे हैं। बस अड्डा मनाली में मंगलवार को देहरादून, हरिद्वार, दिल्ली आदि के लिए जाने वाले पर्यटकों व मजदूरों को फर्श पर बैठ कर बस का इंतजार करते हुए देखा गया। बस अड्डे की चारदीवारी को लोगों ने शौचालय बना रखा है। इससे यहां दुर्गंध भी उठ रही है। बस अड्डे में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। शौचालय भूमिगत मंजिल में होने के कारण लोग वहां तक पहुंच नहीं पा रहे। परिणामस्वरूप बस अड्डे की चारदीवारी के साथ गंदगी फैला रहे हैं। हैरत यह है कि सत्तर के दशक में बने बस अड्डे की जमीन अभी तक हिमाचल पथ परिवहन निगम के नाम नहीं है। स्थानीय निकाय ने इसका निर्माण कर हिमाचल पथ परिवहन निगम को सौंपा था। इसके बाद बस अड्डा यूं ही चलता रहा। जब इसके विस्तार की आवश्यकता हुई तो जमीन वन विभाग के नाम ही पाई गई। लिहाजा बस अड्डे के विस्तार का मामला अधर में लटका हुआ है। वर्तमान में बस अड्डा छोटा पड़ गया है। मनाली से दिल्ली, चंडीगढ़, अंबाला, देहरादून, लुधियाना, धर्मशाला, शिमला, पठानकोट, लेह आदि स्टेशनों के लिए लंबे रूट की बसों के अलावा सैकड़ों स्थानीय रूटों पर बसें संचालित होती हैं, लेकिन बस अड्डे में 40 से अधिक बसें खड़ी नहीं की जा सकती। रात के समय अधिकतर बसें सड़क के किनारे खड़ी रहती हैं। बस अड्डे में यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
बस अड्डे में धूल ही धूल
पर्यटन नगरी मनाली में हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटन कारोबारी प्रवीण सूद, कपिल नेगी, रमेश कुमार, संजीव सिंह ने बताया कि मनाली बस अड्डे की हालात ठीक नहीं है। बस अड्डे में धूल ही धूल है। यहां यात्रियों के लिए बैठने की पर्याप्त सुविधा होनी चाहिए। साथ ही सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल होने के कारण यहां आने वाले लोगों को सुविधाएं भी उसी स्तर की मिलनी चाहिए। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का भी अक्सर आना-जाना लगा रहता है। लिहाजा यहां के बस अड्डे में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलनी चाहिए।
मनाली बस अड्डे की जमीन वन विभाग के नाम है। पहले इसका वन मंजूरी (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) का मामला बनाया गया था, लेकिन मुख्य सचिव ने पुराना मामला होने के कारण इसे सीधा सरकार के पास भेजने के निर्देश दिए हैं। अब यह मामला उपायुक्त के माध्यम से यह सरकार को भेजा गया है। भूमि एचआरटीसी के नाम होते ही यहां पर मल्टी स्टोरी बस अड्डे का निर्माण किया जाएगा।
-डीके नारंग, क्षेत्रीय प्रबंधक एचआरटीसी