सैंज घाटी से वन रक्षक बने जगत राम।
- फोटो : Kullu
सैंज (कुल्लू) । ...कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों। इस कहावत को चरितार्थ कर के दिखाया है सैंज घाटी के रैला गांव के जगत राम ने। जगतराम ने अपने हौसलों से साबित कर दिया कि लक्ष्य को पाने के लिए पैसे की नहीं बल्कि हिम्मत और सच्चे इरादे की जरूरत होती है। वन विभाग में बतौर वन रक्षक उत्तीर्ण हुए जगतराम के संघर्ष की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
दरअसल, जगतराम एक गरीब परिवार से संबंध रखता है। उसके पिता पुने राम लोहे के औजार बनाकर अपना घर को चलाते हैं। उन्होंने कड़ी मेहनत कर बेटे को पढ़ाया-लिखाया। जगतराम की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक पाठशाला से लेकर दसवीं तक की शिक्षा रैला में हुई। बारहवीं सैंज और स्नातक की पढ़ाई डिग्री कॉलेज कुल्लू से की। अभी जगत राम बीएड की पढ़ाई कर रहे हैं। आठवीं कक्षा से ही जगत राम ने खुद गांव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई को जारी रखा। अब जगत राम ने वनरक्षक की परीक्षा पास करके अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है। पिता पूने राम ने बताया कि जगत राम को बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक था और हर एक कक्षा में अच्छे नंबर लेकर पास होता था।
कड़ी मेहनत का बेटे को मिला फल
बेटे की पढ़ाई के लिए पिता ने दिन-रात औजार बनाकर घर-घर जाकर बेचा। वह दिन को स्कूल जाता, शाम को ट्यूशन पढ़ाता और रात को अपनी पढ़ाई करता था। अब उनका बेटा वन विभाग में बतौर वन रक्षक सेवाएं देगा। माता गोकली देवी ने बताया है कि खुशी है कि हमारे इकलौते बेटे ने आज कामयाबी हासिल की है। इस उपलब्धि पर ग्राम पंचायत रैला की प्रधान खिला देवी, ग्राम पंचायत रैला-दो के प्रधान जोगेंद्र सोनी, उप प्रधान कैलाश ठाकुर, सैंज स्कूल के प्रधानाचार्य फतेह सिंह ठाकुर, अध्यापक मनोज शर्मा, अमर ठाकुर, सुखदयाल नेगी, झाबे राम, टेक सिंह, रमेश धामी और समस्त ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की है।