सदियों पुरानी परंपरा का नजारा देखने के लिए उदयपुर में उमड़ा जन सैलाब
एक वर्ष छोड़कर होता है देवी हिडिंबा और माता मृकुला का दैवीय मिलन
अब 2027 में मिलेंगी दोनों बहनें, हिडिंबा ने मृकुला को भेंट स्वरूप दी सुई
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति) देवी हिडिंबा अपनी बहन मृकुला से बिछड़ने के बाद अपने मंदिर जाहलमा में विराजमान हो गई हैं। दोनों बहनों के बिछड़ने का यह दृश्य हर किसी को भावुक कर गया। बिछड़ते समय देवी हिडिंबा ने अपनी बहन मृकुला को सुई भेंट की।
सदियों पुरानी इस परंपरा का निर्वहन शुक्रवार को उदयपुर में किया गया। इस भावुक नजारे को देखने के लिए उदयपुर में भारी जन सैलाब उमड़ा। बताया जा रहा है कि देवी हिडिंबा और माता मृकुला का दैवीय मिलन एक वर्ष छोड़कर होता है। अब 2027 में दोनों बहनों के मिलन की परंपरा का निर्वहन किया जाएगा।
दरअसल, देवी हिडिंबा का मंदिर जाहलमा और माता मृकुला देवी का मंदिर उदयपुर में स्थित है। शुक्रवार को देवी हिडिंबा उदयपुर स्थित माता मृकुला से विदा होकर अपने देवालय लौट गई हैं। इस दौरान निभाई गई रस्म में देवी हिडिंबा के गूर, पुजारी, कारदारों और ग्रामीणों ने अपनी भूमिका निभाई।
वीरवार को देवी हिडिंबा के गूर, पुजारी, कारदार और जाहलमा के ग्रामीण देवी हिडिंबा को लेने उदयपुर स्थित माता मृकुला के मंदिर पहुंचे। शुक्रवार को मंदिर में धार्मिक रस्मों की अदायगी करने के बाद देवी हिडिंबा के गूर, पुजारी और कारदार ग्रामीणों के साथ देवी हिडिंबा को वापस अपने देवालय ले गए हैं। उदयपुर में दोनों देवियों के बिछड़ते समय देवी हिडिंबा अपनी बहन मृकुला को सुई भेंट स्वरूप देकर गई हैं। देवी हिडिंबा के गूर रणवीर ने बताया कि अब 2027 तक के लिए देवी हिडिंबा और माता मृकुला एक दूसरे से बिछड़ गई हैं। बताया कि इस रस्मों की अदायगी पुरातन मान्यताओं के अनुसार की जाती है। यह दृश्य हर किसी के लिए भावुक कर देने वाला होता है। परंपरा को आज भी पूरी देव रीति के अनुसार किया जा रहा है।