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ग्लेशियरों का घर लाहौल-स्पीति सदी के सबसे सूखे की दौर में

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अशोक राणा
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। ग्लेशियरों का घर कहलाने वाली लाहौल घाटी सूखे के दौर से गुजर रही है। लाहौल-स्पीति में करीब 250 छोटे-बडे़ ग्लेशियर हैं। बावजूद इसके इलाका पानी के लिए तरस रहा है।
बीते कुछ सालों से कम बर्फबारी होने और बारिश से लाहौल का 80 फीसदी इलाका पूरी तरह सूखे की चपेट में है। फूल गोभी, हरा मटर समेत अन्य नगदी फसलें खेतों में तैयार होने से पहले ही मुरझा गई हैं। कई इलाकों में जेनरेटर की मदद से खेतों में सिंचाई हो रही है तो कहीं चंद्राभागा नदी का पानी लिफ्ट कर खेतों को तर किया जा रहा है। सूखे की मार नगदी फसलों के साथ सेब पर भी दिखने लगी है।
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बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो सेब के पेड़ों पर लगे फूल मुरझा कर गिर सकते हैं। प्राकृतिक चश्मों में पानी की मात्रा कम होने से कई इलाकों में पेयजल संकट खड़ा हो गया है। घास के मैदान बंजर होने से इस बार पालतू मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। नालों में पानी का स्तर कम होने से किसान प्लास्टिक के बैरल को दो हिस्सों में काटकर और इसे कूहलों में बिछाकर खेतों तक पानी पहुंचा रहे हैं। पहली बार सूखे से फसलों को बचाने के लिए किसान कई किमी नीचे चंद्राभागा नदी से पानी लिफ्ट कर खेतों तक पहुंचाने के प्रयास में जुटे हैं। इसके लिए किसानों ने लाखों रुपये एकत्रित किए हैं। ठोलंग गांव के 56 वर्षीय किसान सुरेश ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इस तरह की सूखे की स्थिति लाहौल में कभी नहीं देखी।
खेतों में गोभी और हरे मटर की फसल पानी की कमी से मुरझाने लगी है। घाटी के तांदी, मूरिंग, कारदंग, गौंधला और पट्टन समेत कई इलाके भयंकर सूखे के दौर से गुजर रहे हैं। 60 साल के किसान विजय, प्रमोद, सुनील, राजेश, दोरजे और रिगजिन ने सरकार से लाहौल को सूखाग्रस्त जिला घोषित करने तथा चारे की व्यवस्था करने की मांग की है। लाहौल-स्पीति जिले में बारिश वैसे भी कम होती है, लेकिन इस साल बारिश पहले से भी कम हुई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. चौधरी राम के अनुसार अटल टनल खुलने के बाद घाटी में बर्फबारी पहले की तुलना में कम हो रही है। वाहनों के धुएं से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है। करीब पिछले तीन साल से कम बर्फबारी के कारण गलेशियर बनने की प्रक्रिया धीमी हो गई है। ऐसे में ग्लेशियरों से तर रहने वाले जल स्रोत सूखने लगे हैं। मई में भी घाटी में नाममात्र ही बारिश हुई है। संवाद
किसानों को दे रहे हरसंभव मदद : मारकंडा
मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा खुद भी मानते हैं कि इस बार घाटी सूखे के दौर से गुजर रही है। कहा कि सरकार खेतों में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने के लिए हरसंभव मदद दे रही है। तांदी और सुमनम गांव तक चंद्राभागा नदी से लिफ्ट कर पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।
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बारिश न होने पर हो सकती है सूखे जैसी स्थिति : चौधरी राम
जिला कृषि अधिकारी चौधरी राम ने कहा कि अगर आने वाले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो लाहौल में सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है। कहा कि कृषि विभाग ने किसानों को पाइप और स्प्रिंकलर उपलब्ध करवाए हैं।
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