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हिमाचल: पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत क्यों है खास? कोरा के दौरान दो महिला श्रद्धालुओं की मौत के बाद फिर चर्चा में

Fri, 18 Sep 2026 12:55 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति)।

सार

लाहौल-स्पीति के केलांग के पास स्थित ड्रिलबुरी पर्वत अपनी धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है। करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर होने वाली इसकी कोरा परिक्रमा में हर साल श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार अचानक बर्फबारी और फिसलन के बीच दो बुजुर्ग महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालु घायल हुए। घटना के बाद ड्रिलबुरी और इसकी धार्मिक परंपरा एक बार फिर चर्चा में है। जानें विस्तार से...
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पवित्र माउंट ड्रिलबुरी की परिक्रमा करते समय तीर्थयात्री बर्फबारी के बीच वहां पहुंचे। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में केलांग के पास स्थित पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत एक बार फिर चर्चा में है। वजह सिर्फ इसकी धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि गुरुवार को यहां हुई दर्दनाक घटना भी है। ड्रिलबुरी की कोरा यानी परिक्रमा के दौरान अचानक बर्फबारी और फिसलन के बीच दो बुजुर्ग महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई। कई अन्य श्रद्धालु घायल हुए और उन्हें उपचार के लिए केलांग अस्पताल पहुंचाया गया।

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आखिर कहां है ड्रिलबुरी?
ड्रिलबुरी पर्वत लाहौल-स्पीति जिला मुख्यालय केलांग के सामने स्थित पवित्र पर्वत है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसकी धार्मिक परिक्रमा करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्र में होती है। वहीं अन्य रिपोर्टों में ड्रिलबु री की ऊंचाई करीब 4,400 मीटर बताई गई है। ऊंचाई अधिक होने के कारण यहां मौसम तेजी से बदल सकता है। सितंबर में हुई इस धार्मिक यात्रा के दौरान भी सुबह अचानक बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे मार्ग पर फिसलन बढ़ गई और श्रद्धालुओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

क्या है ड्रिलबुरी की कोरा?
तिब्बती बौद्ध परंपरा में किसी पवित्र पर्वत या धार्मिक स्थल की परिक्रमा को कोरा कहा जाता है। श्रद्धालु निर्धारित मार्ग पर पैदल चलते हुए पर्वत की परिक्रमा करते हैं। इसे धार्मिक आस्था और साधना से जोड़कर देखा जाता है। ड्रिलबुरी की कोरा भी इसी परंपरा का हिस्सा है। इस यात्रा में श्रद्धालु ऊंचाई वाले कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरते हैं। इसलिए यहां धार्मिक आस्था के साथ मौसम और ऊंचाई की चुनौती भी बनी रहती है।
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क्यों पवित्र माना जाता है ड्रिलबुरी?
ड्रिलबुरी को बौद्ध परंपरा में एक महत्वपूर्ण पवित्र पर्वत माना जाता है। यहां की कोरा श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक साधना का अवसर है। उपलब्ध धार्मिक स्रोतों के अनुसार ड्रिलबुरी को चक्रसंवर से जुड़ा पवित्र पर्वत माना जाता है और इसकी परिक्रमा को आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है। इस यात्रा को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि इन मान्यताओं को आस्था और धार्मिक परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

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इस बार क्यों चर्चा में आया ड्रिलबुरी?
गुरुवार सुबह ड्रिलबुरी की कोरा के दौरान मौसम अचानक बिगड़ गया। रिपोर्टों के अनुसार करीब 4:30 से 5 बजे के बीच तेज बर्फबारी हुई। इससे ऊंचाई वाले मार्ग पर बर्फ जम गई और फिसलन बढ़ गई। इसी दौरान दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई। मृतकों की पहचान दावा डोमा भूटिया (74), निवासी दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल और यांगजिन (61), निवासी केलांग, लाहौल-स्पीति के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी में अत्यधिक ठंड, ऑक्सीजन की कमी और ऊंचाई से संबंधित स्वास्थ्य समस्या की बात सामने आई है। वहीं बर्फ पर फिसलने की वजह से भी श्रद्धालु प्रभावित हुए। मौत का अंतिम कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।

आस्था के साथ बड़ी चुनौती भी
ड्रिलबुरी की कोरा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं है। यह ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में होने वाली कठिन पैदल यात्रा भी है। अचानक बर्फबारी, कम तापमान, फिसलन और ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बन सकती हैं। इस बार दो महिला श्रद्धालुओं की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना ने ड्रिलबुरी की धार्मिक आस्था के साथ-साथ इस कठिन यात्रा की भौगोलिक और मौसम संबंधी चुनौतियों को भी सामने ला दिया है।
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