कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का सात दिवसीय उत्सव देवी-देवताओं की भावुक विदाई से संपन्न हुआ। एक सप्ताह तक देवमिलन, आस्था और भक्ति से सराबोर अठारह करड़ू सौह सूनी पड़ गई।
देवी-देवता भी अपने-अपने देवालयों की ओर लौटे। उनके बिछोह के समय श्रद्धालुओं ने आंखें नम हो गईं। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच देव रथों को विदा करते समय श्रद्धालुओं ने क्षेत्र में खुशहाली और सुख-समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की।
सात दिन तक भगवान रघुनाथ और 300 से अधिक देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि एक सप्ताह तक देवमय रही रघुनाथ की धरा अब अगले वर्ष तक के लिए सूनी हो गई है। संवाद