कुल्लू। दशहरा उत्सव में शामिल होने वाले देवी-देवताओं की अलग-अलग कहानियां हैं। शनिवार को बागन गांव के देवता अजयपाल भी कुल्लू थाना पहुंचे और कुछ देर के लिए विश्राम किया।
देवता के पुजारी नूप राम देवता के इतिहास के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि एक बार देवता अजय पाल कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल से कुल्लू आए थे। उन्होंने एक दिन कुल्लू में गुजारा था। उन्हें यह स्थान उचित नहीं लगा। इसके बाद पत्नी के साथ पीज पहुंचे। यहां से बागन गांव में बैठे। उस दौरान पूरे इलाके में सूखा पड़ा था। लोग परेशान थे। देवता के आने के बाद खूब बारिश हुई। फसल भी अच्छी हुई। इसके बाद देवता का मंदिर बनाया गया। देवता का एक कठियाला खांपू नाम का व्यक्ति था। वह देवता के भंडार के लिए ग्रामीण इलाकों से अनाज एकत्र करता था। खांपू ने उस दौरान किसी व्यक्ति की जमानत दी थी लेकिन वह व्यक्ति पुलिस के पास पेश नहीं हुआ। पुलिस ने खांपू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उसे गिरफ्तार कर ला रही थी तो उसके हाथ में बंधी एक हथकड़ी पहले टूट गई। जब वह पुलिस थाने पहुंचा तो दूसरी बेड़ी भी टूट गई। पुलिस वालों को खांपू के पीछे एक व्यक्ति चलता दिखाई दिया था। वह स्वयं देवता अजय पाल थे। जब दूसरी बेड़ी भी टूट गई तो पुलिस वालों ने भी इसे चमत्कार माना और खांपू को छोड़ दिया। जब खांपू लौट रहा था तो उसे वही व्यक्ति मिला, जिसकी उसने जमानत दी थी। खांपू ने उसे पुलिस के हवाले किया। शनिवार को देवता ने इसी परंपरा का निर्वहन किया और थाना में बैठकर थोड़ी देर विश्राम किया।
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